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अदाणी की खुली लॉटरी, अंबानी को लगा बड़ा झटका! दिग्गज अमेरिकी फर्म ने रिलायंस के शेयर बेच खरीदे अदाणी के शेयर

अमेरिकी निवेश दिग्गज कैपिटल ग्रुप ने अदाणी ग्रुप की 3 कंपनियों में करीब 2 अरब डॉलर का निवेश बढ़ाकर बाजार को चौंका दिया है. वहीं दूसरी तरफ, रिलायंस इंडस्ट्रीज में उसकी हिस्सेदारी लगातार घटने से भारतीय कॉर्पोरेट रेस को लेकर नई बहस छिड़ गई है…

भारतीय शेयर बाजार और कूटनीतिक गलियारे से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने देश के दो सबसे बड़े कॉर्पोरेट दिग्गजों के बीच की रेस को एकदम नया मोड़ दे दिया है. अमेरिका की दिग्गज और दुनिया की सबसे बड़ी निवेश फर्मों में से एक ‘कैपिटल ग्रुप’ ने भारतीय बाजार में एक बहुत बड़ा दांव खेला है.

एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक, इस अमेरिकी फर्म ने अदाणी ग्रुप की कंपनियों पर अपना भरोसा जताते हुए उनमें भारी-भरकम निवेश किया है, जबकि इसके उलट देश के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) से अपने हाथ पीछे खींचते हुए अपनी हिस्सेदारी को तेजी से घटा दिया है.

अदाणी की 3 कंपनियों में झोंके 2 अरब डॉलर

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अमेरिकी फर्म कैपिटल ग्रुप ने अदाणी समूह की तीन प्रमुख कंपनियों—अदाणी पोर्ट्स, अदाणी पावर और अदाणी ग्रीन एनर्जी में करीब 2 अरब डॉलर मूल्य की भारी-भरकम हिस्सेदारी खरीद ली है.

चौंकाने वाली बात यह है कि बीते 5 मई को कैपिटल ग्रुप ने ओपन मार्केट से सीधे अदाणी पोर्ट्स और स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) में लगभग दो प्रतिशत की हिस्सेदारी हासिल की, जिसकी कीमत भारतीय रुपयों में करीब 7,486 करोड़ रुपए (776 मिलियन डॉलर) आंकी गई है. हालांकि, इस महा-डील को लेकर अभी तक अदाणी समूह और कैपिटल ग्रुप दोनों ने ही आधिकारिक तौर पर अपनी कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की है.

अमेरिकी जांच खत्म होते ही निवेशकों की लगी कतार

अदाणी ग्रुप की कंपनियों में विदेशी निवेशकों के इस अचानक उमड़े प्यार के पीछे हाल ही में अमेरिकी सरकार द्वारा लिया गया एक बड़ा फैसला है. दरअसल, अमेरिकी प्रशासन द्वारा अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के खिलाफ लगे सभी आरोपों को पूरी तरह वापस लेने के फैसले को इस ग्रुप के लिए एक ‘महा-जीत’ माना जा रहा है.

मार्केट एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि महीनों की लंबी नियामक जांच के पूरी तरह समाप्त होने के बाद अब वैश्विक स्तर पर निवेशकों का खोया हुआ विश्वास वापस लौट आया है. इस क्लीन चिट के बाद अदाणी के शेयरों में जो तूफानी तेजी आई है, उसने कंपनी के लिए दुनिया भर से वैश्विक पूंजी जुटाने का रास्ता बिल्कुल साफ कर दिया है.

रिलायंस से तोड़ा बरसों पुराना नाता

इस पूरी रिपोर्ट का सबसे हैरान कर देने वाला पहलू रिलायंस इंडस्ट्रीज को लेकर है. ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, कैपिटल ग्रुप का रिलायंस में निवेश पिछले कुछ वर्षों के दौरान बहुत तेजी से और लगातार घटा है. आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जिस कैपिटल ग्रुप के पास मार्च 2017 में रिलायंस इंडस्ट्रीज के रिकॉर्ड 755 मिलियन शेयर हुआ करते थे, वो संख्या छह साल पहले घटकर करीब 500 मिलियन रह गई, और अब ताजा रिपोर्ट के अनुसार कैपिटल ग्रुप के पास रिलायंस के महज 142 मिलियन शेयर ही बचे हैं. इस भारी बिकवाली के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में भी पिछले एक साल के दौरान लगभग 8.36 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.

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भारतीय बाजार में बड़े बदलाव के संकेत

विदेशी निवेशकों के इस बदले मिजाज से साफ है कि अब ग्लोबल इन्वेस्टर्स भारत के कोर इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन एनर्जी और पोर्ट्स जैसे सेक्टर्स को लेकर ज्यादा उत्साहित हैं, जहां अदाणी ग्रुप का एकछत्र राज है. कैपिटल ग्रुप के प्रवक्ता ने हालांकि साफ किया है कि वह नीतिगत कारणों से अपने व्यक्तिगत शेयरों या शेयरधारिता के उतार-चढ़ाव पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं कर सकते.

लेकिन बाजार के पंडितों का मानना है कि रिलायंस जैसी स्थापित पारंपरिक रिफाइनरी और रिटेल कंपनी से पैसा निकालकर अदाणी के न्यू-एज इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में लगाना यह साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में दलाल स्ट्रीट की पूरी तस्वीर और सत्ता का संतुलन पूरी तरह बदलने वाला है.

-भारत एक्सप्रेस



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