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CJP आंदोलन पर क्यों चुप हैं विराट-रोहित? जानिए BCCI के नियम क्या कहते हैं

Virat-Rohit Silent on CJP: CJP आंदोलन और NEET पेपर लीक विवाद पर विराट कोहली, रोहित शर्मा समेत भारतीय क्रिकेटरों की चुप्पी चर्चा में है. जानिए BCCI से जुड़े नियम क्या कहते हैं.

Virat-Rohit Silent on CJP

Virat-Rohit Silent on CJP: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन और संसद की ओर प्रस्तावित “चलो संसद” मार्च को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बहस हो रही है. यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों जैसे कथित NEET पेपर लीक, भर्ती घोटालों, छात्रों की आत्महत्या के मामलों और शिक्षा सुधार की मांगों को लेकर चर्चा में है. इस आंदोलन को लेकर फिल्म जगत की कुछ हस्तियों ने सार्वजनिक रूप से समर्थन भी जताया है. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि भारतीय क्रिकेट टीम के बड़े खिलाड़ी, जैसे विराट कोहली (Virat Kohli on CJP Protest), रोहित शर्मा (Rohit Sharma on CJP Protest) और अन्य स्टार क्रिकेटर इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं.

BCCI के नियम क्या कहते हैं?

BCCI के केंद्रीय अनुबंध (Central Contract) वाले खिलाड़ियों को आचार संहिता का पालन करना होता है. इसके तहत उनसे उम्मीद की जाती है कि वे राजनीतिक या विवादित मुद्दों पर सार्वजनिक बयान देने या किसी पक्ष का खुलकर समर्थन करने से बचें.

हालांकि, BCCI ने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है जिसमें खिलाड़ियों को सामाजिक मुद्दों पर सोशल मीडिया पोस्ट करने से साफ तौर पर रोका गया हो. लेकिन अगर किसी खिलाड़ी का बयान या पोस्ट बोर्ड, भारतीय टीम या क्रिकेट की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला माना जाता है, तो BCCI उसे अनुशासन से जुड़ा मामला मान सकता है.

नियम तोड़ने पर क्या हो सकता है?

अगर कोई केंद्रीय अनुबंध वाला खिलाड़ी किसी विवादित राजनीतिक या सामाजिक अभियान का खुलकर समर्थन करता है और BCCI को लगता है कि इससे बोर्ड या भारतीय क्रिकेट की छवि प्रभावित हुई है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. इसमें चेतावनी, जुर्माना, निलंबन या अनुबंध से जुड़ा कोई अन्य कदम शामिल हो सकता है.

ब्रांड एंडोर्समेंट भी एक वजह

BCCI के नियमों के अलावा, बड़े खिलाड़ियों के विज्ञापन अनुबंध भी उनकी सार्वजनिक प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं. विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसी हस्तियां कई बड़ी कंपनियों के ब्रांड एंबेसडर हैं. कई कंपनियां अपने अनुबंध में “मोरैलिटी क्लॉज” जैसी शर्तें रखती हैं कि किसी विवादित मुद्दे पर बयान देने से ब्रांड की छवि प्रभावित होने पर वे कार्रवाई या अनुबंध खत्म करने का फैसला ले सकती हैं.


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पहले भी ऐसा देखा गया है

भारतीय क्रिकेटर पहले भी राजनीतिक या संवेदनशील सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बोलने से बचते रहे हैं. कई बार उन्होंने सिर्फ आधिकारिक या संस्थागत अपीलों के मुताबिक ही अपनी बात रखी है. इसी वजह से CJP आंदोलन पर उनकी चुप्पी को भी कुछ लोग BCCI के नियमों और विज्ञापन अनुबंधों से जोड़कर देखते हैं. हालांकि, किसी खिलाड़ी के कुछ न बोलने का मतलब यह नहीं है कि उसे उस मुद्दे की परवाह नहीं है. इसके पीछे पेशेवर जिम्मेदारियां और अनुबंध जैसी कई वजहें हो सकती हैं.

-भारत एक्सप्रेस



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