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ब्रह्मांचल पर्वत पर 500 साल पुराना राधा रानी मंदिर, जानिए बरसाना के लाड़लीजी मंदिर की खास मान्यता

Radha Ashtami: राधाष्टमी पर बरसाना के ब्रह्मांचल पर्वत स्थित राधा रानी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन होते हैं. लगभग 500 साल पुराने बताए जाने वाले इस मंदिर को राधा-कृष्ण भक्ति और ब्रज संस्कृति का प्रमुख केंद्र माना जाता है.

Radha Ashtami Radha Rani Temple Barsana

 Radha Ashtami 2026- bharat express

Radha Rani Temple Barsana: राधाष्टमी के अवसर पर बरसाना स्थित राधा रानी मंदिर में श्रद्धालुओं की विशेष आस्था देखने को मिलती है. ब्रह्मांचल पर्वत पर स्थित यह प्राचीन मंदिर राधा-कृष्ण भक्ति परंपरा का प्रमुख केंद्र माना जाता है. मंदिर से जुड़ी मान्यताएं, इसकी स्थापत्य शैली और बरसाना की धार्मिक परंपराएं इसे खास बनाती हैं.

ब्रह्मांचल पर्वत पर विराजमान हैं राधा रानी

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित बरसाना को राधा रानी की जन्मभूमि के रूप में धार्मिक परंपरा में विशेष स्थान प्राप्त है. यहां ब्रह्मांचल पर्वत पर स्थित राधा रानी मंदिर को स्थानीय रूप से श्री राधा रानी मंदिर या लाड़लीजी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. ऊंचाई पर बने इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. पर्वत की चोटी से बरसाना का मनोरम दृश्य दिखाई देता है, जिससे धार्मिक यात्रा के साथ-साथ यहां का आध्यात्मिक अनुभव भी विशेष बन जाता है.

500 साल पुराना बताया जाता है मंदिर

मंदिर के इतिहास को लेकर स्थानीय परंपराओं में इसे लगभग 500 वर्ष पुराना बताया जाता है. इसके निर्माण और विकास को लेकर अलग-अलग धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताएं प्रचलित हैं. मंदिर की वर्तमान संरचना में राजस्थानी और ब्रज स्थापत्य शैली की झलक देखने को मिलती है. मंदिर के गर्भगृह में राधा रानी की प्रतिमा के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं. भक्त उन्हें प्रेम और वात्सल्य के भाव से ‘लाड़लीजी’ के नाम से पुकारते हैं.

राधाष्टमी पर उमड़ता है आस्था का सैलाब

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधाष्टमी मनाई जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन राधा रानी का प्राकट्य हुआ था. इसलिए बरसाना में राधाष्टमी का पर्व विशेष उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है. इस अवसर पर मंदिर को फूलों और रंग-बिरंगी सजावट से सजाया जाता है. विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु राधा रानी के दर्शन करने के लिए बरसाना पहुंचते हैं.

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बरसाना की गलियों में दिखती है ब्रज संस्कृति

राधा रानी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि ब्रज की लोक परंपराओं और संस्कृति का भी महत्वपूर्ण केंद्र है. बरसाना की गलियों में राधा-कृष्ण से जुड़े भजन और लोकगीत सुनाई देते हैं. यहां की होली, विशेषकर लट्ठमार होली, देशभर में प्रसिद्ध है. राधाष्टमी के दौरान बरसाना का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है. श्रद्धालुओं के लिए यह पर्व राधा रानी के प्रति आस्था व्यक्त करने और ब्रज की प्राचीन भक्ति परंपरा से जुड़ने का अवसर माना जाता है.

क्यों खास है राधा रानी मंदिर?

ब्रह्मांचल पर्वत पर स्थित यह मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं, प्राचीन परंपराओं और बरसाना की ब्रज संस्कृति के कारण श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है. राधाष्टमी के दिन यहां होने वाले उत्सव में भक्ति, लोक संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिलता है.

भारत एक्सप्रेस



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