8 करोड़ कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर
कर्मचारियों के भविष्य निधि संगठन (ईपीएफ) केन्द्र सरकार द्वारा बढ़ाए जाने को चुनौती देने वाली जनहित याचिका का सुप्रीम कोर्ट ने निपटारा कर दिया है. जस्टिस बी. वी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन के बेंच ने याचिकाकर्ता की दलीलों को सुनने के बाद दायर याचिका का निपटारा कर दिया है.
मामले की सुनाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि अखबारों में प्रकाशित खबरों के मुताबिक केंद्रीय कैबिनेट ने वेतन सीमा बढ़ाने को मंजूरी दे दी है.
12 वर्षो में नहीं बदली वेतन सीमा
बता दें कि इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं किया गया है. याचिकाकर्ता ने कहा कि EPF की वेतन सीमा में नियमित अंतराल पर संशोधन होना चाहिए. उन्होंने कहा कि 15000 की मौजूदा सीमा करीब 12 वर्षो से नहीं बदली गई है.
ऐसे में यदि 25000 की नई सीमा भी लंबे समय तक संशोधित नहीं की गई तो भविष्य में यह राशि कई राज्यों में लागू न्यूनतम मजदूरी से कम हो सकती है.
समय-समय पर हो अनिवार्य संसोधन: कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कैबिनेट के फैसले के बाद संबंधित पक्षों की ओर से आवश्यक अगली कार्रवाई की जाएगी. अदालत ने कहा कि कैबिनेट के फैसले को देखते हुए अब इस रिट याचिका पर आगे किसी विचार की आवश्यकता नहीं है. हालांकि कोर्ट ने ईपीएफ वेतन सीमा में समय-समय पर अनिवार्य संशोधन किए जाने की मांग पर विचार करने से इनकार कर दिया है.
याचिका में केंद्र सरकार और EPFO को कर्मचारी भविष्य निधि योजना के तहत वेतन सीमा में भविष्य में संशोधन के लिए एक गतिशील फार्मूला पर विचार करने और उसे लागू करने के निर्देश देने की मांग की गई थी.
25 हजार से ज्यादा पर योगदान स्वैच्छिक
बता दें कि केंद्र सरकार ने ईपीएफओ की वेतन सीमा 15 हजार रुपए से बढ़ाकर 25 हजार रुपए कर दी गई है. इससे 8 करोड़ से ज्यादा सदस्यों को अब 25 हजार रुपए तक की वेतन पर ईपीएफ, कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना में अनिवार्य रूप से योगदान करना होगा. 25 हजार रुपये से ज्यादा वेतन पर योगदान करना स्वैच्छिक होगा.
-भारत एक्सप्रेस
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