सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में हुए चर्चित सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में 22 आरोपियों को बरी करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सीबीआई और हाई कोर्ट से बरी किए गए लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट 28 अक्टूबर को मामले में अगली सुनवाई करेगा.
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है. सोहराबुद्दीन शेख के भाई रुबाबुद्दीन शेख ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ यह याचिका दायर की है. 7 मई 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था. बॉम्बे हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा कुल 22 आरोपियों (जिसमें 21 गुजरात, राजस्थान और आंध्र प्रदेश के पुलिसकर्मी है) कि रिहाई को सही ठहराया है.
मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि कोर्ट कुछ महत्वपूर्ण गवाहों के बयान देखना चाहता है. उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड को पूरा तलब नहीं किया जा रहा है, बल्कि पक्षकार 3-4 ऐसे बयान दे जिन्हें वे सबसे महत्वपूर्ण मानते है. कोर्ट इन बयानों के आधार पर आरोपियों के बरी होने के फैसले की जांच करेगा. वही, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि 92 गवाहों का अपने बयान से मुकर जाना चिंता का विषय है.
22 आरोपियों के बरी होने के फैसले को हाई कोर्ट ने बरकरार रखा
उन्होंने कहा कि यह भी देखा जाना जरूरी है कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई निष्पक्ष और न्यायपूर्ण तरीके से हुई थी या नहीं. बॉम्बे की विशेष अदालत ने वर्ष 2018 में सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया था. इसके खिलाफ रुबाबुद्दीन और नायबुद्दीन शेख ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी. जिसपर सभी पक्षों की जिरह के बाद हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए दायर याचिका को खारिज कर दिया था.
बता दें कि सोहराबुद्दीन शेख उसकी पत्नी और प्रजापति हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली बस से जा रहे थे, तभी 22-23 नवंबर 2005 की रात पुलिस के एक दल ने उन्हें कथित तौर पर हिरासत में ले लिया. आरोप है कि यह दंपत्ति और प्रजापति को अलग-अलग वाहनों से ले जाया गया. सीबीआई के मुताबिक सोहराबुद्दीन 26 नवंबर 2005 को अहमदाबाद के पास मुठभेड़ में मारा गया था.
यह कार्रवाई गुजरात और राजस्थान पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की थी. उसके तीन दिन बाद सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर बी की भी हत्या कर दी गई थी. वहीं 2006 में मामले में मुख्य गवाह तुलसीराम प्रजापति की भी एक दूसरे कथित फेक एनकाउंटर में मारा गया था. शुरुआती जांच के दौरान इस मामले की जांच गुजरात सीआईडी द्वारा की गई. बाद में मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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