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‘सुप्रीम कोर्ट को कोई डरा नहीं सकता…’ विरोध मार्च मामले पर CJI की दो टूक, केंद्र और पुलिस को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने हालिया राजनीतिक विरोध मार्च और एसआईआर मामले पर सुनवाई करते हुए केंद्र और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सुप्रीम कोर्ट को कोई डरा नहीं सकता.

Supreme Court Notice To Centre Delhi Police Protest March Hearing
Edited by Vaibhav Gupta

देश की सर्वोच्च अदालत में राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों और हालिया मार्च को लेकर तीखी कानूनी तकरार देखने को मिल रही है. मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट परिसर के बाहर हाल ही में हुए विरोध मार्च और एसआईआर (SIR) से जुड़ी गड़बड़ियों के मामलों पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने इन सभी पक्षों से जवाब तलब किया है और साथ ही सुप्रीम कोर्ट परिसर के सीसीटीवी फुटेज को भी सुरक्षित रखने के सख्त निर्देश दिए हैं.

राहुल गांधी समेत कई नेताओं पर याचिका

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले गए एक राजनीतिक मार्च के सिलसिले में कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग वाली याचिकाएं कोर्ट के सामने आई हैं. इन याचिकाओं में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा जैसे दिग्गज नेताओं के नाम शामिल हैं. सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने कोर्ट में दलील दी कि किसी भी राजनीतिक जुलूस या इस तरह के आयोजनों का असर सुप्रीम कोर्ट की गरिमा पर नहीं पड़ना चाहिए.

इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए दो टूक कहा कि सुप्रीम कोर्ट को कोई भी डरा या धमका नहीं सकता. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अदालत बाहर और अंदर चल रही हर हलचल से पूरी तरह वाकिफ है और कोई भी काल्पनिक दुनिया में नहीं जी रहा है. हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में फैसला सुनाने से पहले याचिकाकर्ताओं में से एक को अपने आचरण पर स्पष्टीकरण देना होगा.

पत्रकारों की सुरक्षा पर अहम निर्देश

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विरोध प्रदर्शनों को कवर करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर भी एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि एक महिला पत्रकार द्वारा दर्ज कराई गई छेड़छाड़ की शिकायत पर विचार होने तक पुलिस उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न करे.

बेंच ने माना कि पत्रकार अपनी प्रोफेशनल ड्यूटी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का एक साथ उपयोग करते हैं, इसलिए उन्हें विशेष संरक्षण मिलना बेहद जरूरी है. इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि आज के समय में मोबाइल और रील्स के दौर में असली और मान्यता प्राप्त पत्रकारों की पहचान करना मुश्किल होता जा रहा है.

यह भी पढ़ें: राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से राहत, चेक बाउंस केस में मध्यस्थता से सुलझेगा मामला

-भारत एक्सप्रेस



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