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‘बिना सुने ही दे दिया FIR का आदेश!’ 1,000 करोड़ के घोटाले में फंसे DMK नेता ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

KN Nehru Supreme Court Plea: कैश फॉर जॉब मामले में आरोपी और तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) नेता के एन नेहरू ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. के एन नेहरू ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर की समीक्षा करने की मांग की है.

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1,000 करोड़ के घोटाले में फंसे DMK नेता ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

KN Nehru Supreme Court Plea: कैश फॉर जॉब मामले में आरोपी और तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) नेता के एन नेहरू ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. के एन नेहरू ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर की समीक्षा करने की मांग की है.

मद्रास हाईकोर्ट में दायर याचिका में फरवरी के आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की गई थी. फरवरी के उस आदेश में सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय को तुरंत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था.

13 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ था एफआईआर

विजिलेंस और एंटी करप्शन निदेशालय ने 1,020 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार मामले में पूर्व मंत्री केएन नेहरू सहित 13 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया था. इनलोगो पर सरकारी.टेंडर में हेरफेर और रिश्वत वसूलने का आरोप है. आरोप है कि टेंडर्स खुलने से पहले ही सरकारी कॉन्ट्रेक्ट्स में हेराफेरी की गई.

टॉयलेट बनाने और काम की आउटसोर्सिंग सहित कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स के लिए पहले से तय कॉन्ट्रेक्ट्स को 7.5 फीसदी से 10 फीसदी रिश्वत लेकर दिए गए. ईडी के अधिकारियों ने बताया था कि भुगतान और हवाला लेनदेन के जरिए किए गए.

कैश फॉर जॉब घोटाले में बने आरोपी

हाई कोर्ट ने यह मूल आदेश एआईएडीएमके के राज्यसभा सांसद आईएस इनबदुरई दायर याचिका पर आदेश पारित किया था. दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि कि राज्य पुलिस ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दी गई उस जानकारी पर कोई कार्रवाई नहीं की, जिसमें 2,538 सरकारी पदों पर भर्ती के दौरान 634 करोड़ रुपये के नौकरी कैश फॉर जॉब घोटाले का जिक्र किया था.

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हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान नेहरू की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया था कि उनका पक्ष सुने बिना ही यह निर्देश जारी कर दिया, जबकि ये आरोप उनके नगर प्रशासन मंत्री रहने के कार्यकाल से जुड़े थे. उन्होंने कहा था कि यह आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है और इसपर पुनर्विचार किया जाना चाहिए. उस समय डीएमके के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने भी इस आदेश पर पुनर्विचार की मांग की थी.

-भारत एक्सप्रेस



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