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गोपाल कृष्ण




भारत एक्सप्रेस


दिल्ली में दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाही के दौरान एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चल रही सुनवाई के बीच अचानक अश्लील वीडियो चलने लगा.

दिल्ली शराब नीति से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई की अपील पर दिल्ली हाई कोर्ट 4 मई को सुनवाई करेगा.

SC ने मृत्युदंड के मामलों में फैसला सुनाते हुए निचली अदालतों के लिए सजा तय करने से पहले आरोपी की परिस्थितियों पर गहन रिपोर्ट मंगाना अनिवार्य कर दिया है. जस्टिस विक्रमनाथ की पीठ ने बताया कि सजा का संतुलन और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित नहीं किया जा सकता.

ईडी के समन की अनदेखी करने के मामले में अरविंद केजरीवाल को निचली अदालत से मिली राहत अब हाई कोर्ट की रडार पर है. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने ईडी की अपील पर केजरीवाल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

AI के दौर में हस्तियों की निजता और पहचान की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है. बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन कपूर ने अपनी पहचान के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए दिल्ली HC का दरवाजा खटखटाया. कोर्ट ने अभिव्यक्ति की आजादी और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की बात कही है.

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एआई समिट के दौरान हुए प्रदर्शन के मामले में यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदयभानु चिब सहित 18 लोगों के खिलाफ 5000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है. पुलिस ने इसे सरकार को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश बताया है.

West Bengal Elections: बंगाल चुनाव में ऑब्जर्वर नियुक्त हुए IPS अजय पाल शर्मा की भूमिका सवालों के घेरे में है. उन पर पद के दुरुपयोग और पक्षपात का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिससे राज्य का सियासी पारा और चढ़ गया है.

कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में I-PAC निदेशक विनेश चंदेल की नियमित जमानत याचिका पर 30 अप्रैल को कोर्ट सुनवाई करेगा. अदालत ने गंभीर आर्थिक अपराधों का हवाला देते हुए उनकी अंतरिम राहत की मांग को पहले ही खारिज कर दिया है.

जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने जनहित याचिकाओं पर SC में खारिज करते हुए कहा कि देश में पहले से ही पर्याप्त कानूनी प्रावधान मौजूद हैं. न्यायालय ने जोर देकर कहा कि अदालतें कानून की व्याख्या तो कर सकती हैं, लेकिन वे संसद को नया कानून बनाने के लिए मजबूर नहीं कर सकतीं.

Religious Institutions Rules: सबरीमाला मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धार्मिक संस्थानों के संचालन के लिए नियम और ढांचा होना अनिवार्य है. कोर्ट ने जोर दिया कि प्रबंधन का अर्थ 'अराजकता' नहीं हो सकता.