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गोपाल कृष्ण




भारत एक्सप्रेस


खनिज युक्त भूमि पर टैक्स लगाने के राज्यों को अधिकार देने से जुड़े मामले में केंद्र सरकार की क्यूरेटिव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट जनवरी 2026 में सुनवाई कर सकती है. सीजेआई सूर्यकांत ने क्यूरेटिव याचिका पर सुनवाई का भरोसा दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के मामले में जल्द सुनवाई करने का निर्णय लिया है. सोमवार को कोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा. एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने अदालत में इस मामले की गंभीरता को उजागर करते हुए कहा कि राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर अत्यधिक भयावह हो चुका है.

संविधान दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के आदर्शों और सामाजिक न्याय की अहमियत पर जोर दिया. सीजेआई सूर्यकांत ने 24 साल बाद संविधान के 100 साल पूरे होने पर आत्ममंथन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला.

दिल्ली पुलिस ने तिहाड़ जेल में बंद स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती और अन्य के खिलाफ लड़कियों से यौन शोषण मामले में पटियाला हाउस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है. कोर्ट ने दायर चार्जशीट पर सुनवाई 27 नवंबर को निर्धारित की है.

जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में आरोपी और बारामूला सांसद राशिद इंजीनियर की ओर से दायर अर्जी पर पटियाला हाउस कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. राशिद ने संसद के शीतकालीन सत्र में भाग लेने के लिए हिरासत पैरोल या अंतरिम जमानत की मांग की है.

दिल्ली लाल किला कार धमाके मामले में सातवें आरोपी शोएब और आमिर राशिद अली को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और पुड्डुचेरी में चल रहे एसआईआर (Special Summary Revision) मामलों की सुनवाई के दौरान बीएलओ (BLO) की मौत पर गंभीर चिंता जताई. पश्चिम बंगाल सरकार ने अदालत को बताया कि अब तक 23 बीएलओ की मृत्यु हो चुकी है.

भारती सीमेंट्स के निदेशक बालाजी गोविंदप्पा को अगली सुनवाई से पहले सरेंडर करने का आदेश दिया है. साथ ही कोर्ट ने गोविंदप्पा को मिली डिफॉल्ट जमानत को रद्द कर दिया है. यह घोटाला वाईएसआर कांग्रेस सरकार के दौरान हुआ था.

पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की ओर से दायर ट्रांसफर अर्जी पर राऊज एवेन्यु कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा हैं. कोर्ट 6 दिसंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. अर्जी में मौजूदा जज डॉक्टर विशाल गोगने को बदलने की मांग की गई है.

CJI कांत ने कहा कि न्याय प्रणाली में मौजूद “अदृश्य पीड़ितों” की पीड़ा को दूर करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बार के सदस्यों पर है. वकीलों की सोच, गंभीरता और अपने पेशे के प्रति समर्पण सीधे तौर पर देश के संवैधानिक भविष्य को प्रभावित करता है.