Govind Kumar Singh
मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।
भारत एक्सप्रेस
NMACC India Weekend: अब न्यूयॉर्क में गूंजेगा भारतीय स्वाद और संस्कृति का संगम, नीता अंबानी की ये है खास पहल
रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन नीता अंबानी और मशहूर शेफ विकास खन्ना एक खास इवेंट लेकर आ रहे हैं, जो भारतीय परंपरा, कला और खानपान को दुनिया के सामने नए अंदाज़ में पेश करेगा.
भारत की Skyroot को मिला अमेरिकी स्पेस जायंट Axiom का साथ, तैयार हो रहा अरबों डॉलर का गेमचेंजर प्लान!
Axiom Space के सीईओ तेजपाल भाटिया और Skyroot के सीईओ पवन कुमार चंदना ने साइन किया. इस साझेदारी के ज़रिए लॉन्चिंग से लेकर ऑर्बिट में काम करने वाले समाधानों पर दोनों कंपनियां मिलकर काम करेंगी.
FDI में जबरदस्त उछाल, अप्रैल में भारत में निवेश हुई 3.95 अरब डॉलर की विदेशी पूंजी, विदेश में पढ़ाई पर लगातार गिर रहा खर्च
रिज़र्व बैंक (RBI) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, भारत को अप्रैल 2025 में कुल 3.95 अरब डॉलर का नेट विदेशी निवेश (FDI) मिला है. यह बीते 35 महीनों में सबसे ज़्यादा है और पिछले साल अप्रैल की तुलना में दोगुना.
“आपातकाल लोकतंत्र पर सबसे बड़ा आघात, लोकतंत्र कुचलने वालों ने अब तक नहीं मांगी माफी”, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले का कांग्रेस पर हमला
हिंदुस्थान समाचार के समूह संपादक राम बहादुर राय ने कहा कि आपातकाल को केवल एक राजनीतिक घटना मानना पर्याप्त नहीं है. एक डरी हुई महिला (इंदिरा गांधी) पूरे देश को डराने का प्रयास कर रही थी.
Axiom-4 Mission: भारत के शुभांशु शुक्ला ने रचा इतिहास, अब ISS पर करेंगे साइंस के बड़े प्रयोग, जानिए क्या है Axiom-4 मिशन
Axiom-4 एक प्राइवेट स्पेस मिशन है जिसे अमेरिकी कंपनी Axiom Space, NASA और SpaceX की साझेदारी में चला रही है. यह मिशन पूरी तरह से कमर्शियल है, यानी सरकारों से अलग, प्राइवेट लेवल पर संचालित हो रहा है. लेकिन खास बात ये है कि शुभांशु शुक्ला की इस यात्रा को भारत सरकार ने पूरी तरह फंड किया है.
चीन का नया ‘मच्छर ड्रोन’, साइंस फिक्शन जैसी है तकनीक, लेकिन असल में है बहुत खतरनाक
हाल ही में चीन की सरकारी मीडिया ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वैज्ञानिक हाथ में एक बेहद छोटा, मच्छर जैसे दिखने वाला ड्रोन पकड़े नजर आए. ये कोई खिलौना नहीं, बल्कि चीन की अगली जासूसी तकनीक हो सकती है. दावा है कि ये माइक्रो ड्रोन सैन्य अभियानों के साथ-साथ उन मिशनों में भी काम आएंगे जहां बेहद गोपनीयता की जरूरत होती है.
Viral Video: फॉलोअर्स की भूख में पटरियों पर उतरी ‘ड्रामा क्वीन’, 15 ट्रेनों को करना पड़ा डायवर्ट, पुलिस के छूट गए पसीने
तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले में एक महिला ड्राइवर ने ऐसा कारनामा कर डाला, जिसे देखकर रेलवे कर्मचारी, पुलिस और आम लोग सभी हैरान रह गए. महिला ने अपनी कार सीधे रेलवे ट्रैक पर दौड़ा दी और वो भी आराम से. जैसे हाईवे पर चल रही हो.
75वीं पुण्यतिथि पर याद किए गए स्वामी सहजानंद सरस्वती, भारत एक्सप्रेस के चेयरमैन उपेंद्र राय बोले- ‘भारत को विकसित बनाना है तो जाति से ऊपर उठकर सोचना होगा’
उपेंद्र राय ने कहा कि आज हमारे देश में 38 लाख जातियां और साढ़े तीन लाख धर्म-संप्रदाय हैं. इतनी विविधता अगर ताकत बनती, तो बात अलग थी, लेकिन यहां ये भेदभाव का आधार बन गई है. जिस देश में इतनी दीवारें खड़ी हों, वहां समग्र विकास मुमकिन नहीं है.
मिशन स्कूल्स ऑफ एक्सीलेंस: स्मार्ट क्लासरूम से STEM लैब तक, पीएम मोदी के गृहराज्य गुजरात ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे रचा इतिहास
मिशन स्कूल्स ऑफ एक्सीलेंस के तहत गुजरात में 1.50 लाख स्मार्ट क्लासरूम बनाने का लक्ष्य है, जिनमें से 1.09 लाख क्लासरूम तैयार हो चुके हैं और 26,000 में काम जारी है. 5,000 नई STEM लैब्स का निर्माण पूरा कर लिया गया है.
GFR Reform: शोधकर्ताओं की मुश्किलें हुई कम, मोदी सरकार ने आसान किए रिसर्च से जुड़े नियम
सरकारी खरीद में एक नियम होता है कि ब्रांड का नाम नहीं लिया जा सकता, बल्कि तकनीकी गुण बताए जाने चाहिएं. ऐसे में कंपनियां सस्ते में कम गुणवत्ता वाली मशीनें बेच देती हैं और वैज्ञानिक मजबूरी में वही खरीदते हैं.







