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बांग्लादेश में हंगामा… खालिदा जिया के करीबी का आरोप- यूनुस सरकार के सलाहकार ही हैं ‘भ्रष्टाचार के असली खिलाड़ी’

Bangladesh: सत्तार ने नाम लिए बिना ये भी कहा कि अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस को सब पता है, फिर भी कोई कदम नहीं उठाया जा रहा. आरोप तो यहां तक हैं कि यूनुस के दौर में भ्रष्टाचार पहले से भी ज्यादा बढ़ गया है.

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Bangladesh: ढाका में बांग्लादेश की सियासत फिर गरमा गई है. बीएनपी प्रमुख खालिदा जिया के निजी सचिव ए बी एम अब्दुस सत्तार ने सीधे-सीधे अंतरिम सरकार के कई सलाहकारों पर भ्रष्टाचार के बड़े आरोप ठोक दिए हैं. उनका कहना है कि देश में किसी अहम पोस्टिंग या तबादले के पीछे इन्हीं सलाहकारों का हाथ होता है, बिना उनकी मर्जी के पत्ता भी नहीं हिलता.

ये बयान उन्होंने ढाका के बीआईएएम ऑडिटोरियम में, बांग्लादेश एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस एसोसिएशन के एक सेमिनार के दौरान दिया. विषय था “जुलाई जनविद्रोह की अपेक्षाएं और भविष्य का लोक प्रशासन”, लेकिन चर्चा भ्रष्टाचार की आग में सुलग उठी.

“सबूत हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं”

सत्तार का दावा है कि उनके पास कम से कम आठ सलाहकारों के “असीमित भ्रष्टाचार” के पुख्ता सबूत हैं. यहां तक कि खुफिया एजेंसियों के पास भी ये रिकॉर्ड मौजूद है, लेकिन किसी के खिलाफ कोई एक्शन नहीं हो रहा. उन्होंने तंज कसा, “अगर किसी सलाहकार के सहायक निजी सचिव के खाते में 200 करोड़ टका मिल जाए, तो भी कार्रवाई नहीं होती? क्या नुरजहां बेगम स्वास्थ्य मंत्रालय चला सकती हैं? और क्या दो बड़े मंत्रालय किसी अनुभवहीन को देना सही है?”

यूनुस सरकार पर सीधा हमला

सत्तार ने नाम लिए बिना ये भी कहा कि अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस को सब पता है, फिर भी कोई कदम नहीं उठाया जा रहा. आरोप तो यहां तक हैं कि यूनुस के दौर में भ्रष्टाचार पहले से भी ज्यादा बढ़ गया है.

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बीएनपी का पुराना आरोप

याद दिला दें, बीएनपी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने पिछले महीने ही कहा था कि देश में सुशासन नाम की कोई चीज नहीं है, वसूली के रेट आसमान छू रहे हैं. पहले जहां एक व्यापारी को एक लाख टका देना पड़ता था. अब पांच लाख तक वसूले जा रहे हैं. पुलिस व्यवस्था में भी कोई बदलाव नहीं आया.

पर्दे के पीछे से खेलने में माहिर है बीएनपी

गौरतलब है, बीएनपी और कट्टरपंथी इस्लामी ताकतों ने ही छात्र नेताओं और यूनुस के साथ मिलकर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सरकार को सत्ता से बाहर किया था, लेकिन हसीना का यूं अचानक सत्ता से बाहर होना, दुनिया भर में बांग्लादेश के लोकतांत्रिक ढांचे पर बड़ा झटका माना गया. इस अंतरिम सरकार पर पहले से ही आरोप हैं कि वह चरमपंथी संगठनों को संरक्षण दे रही है.

– भारत एक्सप्रेस



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