Adani Bravus Mining: ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड सुप्रीम कोर्ट ने कार्मिकल कोयला खदान के खिलाफ लंबे समय से विरोध कर रहे पर्यावरण एक्टिविस्ट बेन पेनिंग्स को एडानी समूह की ब्रावस कंपनी की गोपनीय जानकारी हासिल करने या उसका इस्तेमाल करने से स्थायी रूप से रोक दिया है. यह आदेश सालों तक चली कानूनी लड़ाई का अंत करता है, जिसमें पेनिंग्स ने लगातार खदान और उससे जुड़े ठेकेदारों के कामकाज में हस्तक्षेप करने की कोशिश की थी.
क्या कहा गया आदेश में?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत पेनिंग्स अब ब्रावस के कर्मचारियों, ठेकेदारों या संभावित ठेकेदारों से कोई भी गोपनीय व्यावसायिक जानकारी प्राप्त नहीं कर सकते. इसके अलावा उन्हें किसी और को ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करने की अनुमति भी नहीं है. आदेश ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध केवल गुप्त जानकारी और गैरकानूनी हस्तक्षेप तक सीमित है; पेनिंग्स अभी भी कानूनी विरोध प्रदर्शन और सक्रियता कर सकते हैं.
ब्रावस की मुख्य परिचालन अधिकारी मिक क्रो ने कहा, “हमारा उद्देश्य हमेशा यह सुनिश्चित करना था कि हमारे कर्मचारी और ठेकेदार डर या धमकी का सामना न करें. यह मुकदमा पैसे के लिए नहीं था. बस हम चाहते थे कि पेनिंग्स हमारी गोपनीय जानकारी का गलत इस्तेमाल न करें और हमारे कामकाज में बाधा न डालें.”
विरोध की वजह और नुकसान
कोर्ट में पेश किए गए सबूतों के अनुसार, पेनिंग्स की ब्लॉकेड, ऑफिस में घुसपैठ और ठेकेदारों पर दबाव की कार्रवाई ने कई बड़े व्यवसायों को ब्रावस से अपने संबंध तोड़ने के लिए मजबूर कर दिया. कुछ कंपनियों को सुरक्षा बढ़ानी पड़ी. पेनिंग्स खुद भी पिंकेंबा में विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार हो चुके हैं.
अदानी के लिए बड़ी जीत
ब्रावस ने कहा कि कार्मिकल खदान और रेल नेटवर्क पिछले चार साल से चालू हैं और हजारों क्वीनसलैंडर्स को रोजगार देते हैं. अदालत का यह फैसला कंपनी के कर्मचारियों, ठेकेदारों और वैध कामकाज की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है. कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह शांतिपूर्ण और कानूनी सक्रियता का स्वागत करती है, बशर्ते वह धमकी या गोपनीय जानकारी के दुरुपयोग में न बदले.
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-भारत एक्सप्रेस
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