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Yash Chopra Birthday: स्विट्ज़रलैंड से यश चोपड़ा का अनोखा रिश्ता,नाम पर चलती है ट्रेन और सड़क

बॉलीवुड के रोमांस को विदेशों तक ले जाने वाले यश चोपड़ा का नाम आज भी सम्मान से लिया जाता है. उनकी फिल्में एक्शन, ड्रामा,हिंसा के साथ मोहब्बत की गहराई भी पेश करती थीं.

Yash Chopra Birthday: बॉलीवुड के रोमांस को विदेशों तक ले जाने वाले यश चोपड़ा का नाम आज भी सम्मान से लिया जाता है. उनकी फिल्में न केवल एक्शन या ड्रामा बल्कि मोहब्बत की गहराई भी पेश करती थीं. उनकी फिल्मों का एक पहलू ऐसा था, जिसने विदेशी धरती पर भी उनका नाम अमर कर दिया. चाहे वो लंदन हो या स्विट्जरलैंड, यश चोपड़ा ने दुनिया के कोने-कोने में भारत का नाम रोशन किया. यह यश चोपड़ा की ही देन थी कि भारतियों के लिए स्विट्ज़रलैंड एक रोमांटिक ड्रीम डेस्टिनेशन बना. यश चोपड़ा को सिनेमा जगत में उनके योगदान के लिए कई पुरुस्कारों से सम्मानित किया गया है.

यश चोपड़ा का जन्म 27 सितंबर 1932 को लाहौर (अब पाकिस्तान में) में हुआ था. यश चोपड़ा बचपन से इंजीनियर बनना चाहते थे जिसके लिए लंदन जाने की भी तैयारी थी, लेकिन उनके किस्मत में फिल्म र्निमाता बनना लिखा था. जिसके लिए वो अपने बड़े भाई बीआर चोपड़ा के पास मुंबई आ गए और 1959 में उन्होंने अपनी पहली फिल्म धूल का फूल डायरेक्ट की. जिसने उन्हें तुरंत फिल्म इंडस्ट्री में पहचान दिला दी.

धीरे-धीरे यश चोपड़ा ने दीवार, त्रिशूल, कभी-कभी, सिलसिला, डर, इत्तेफाक और लम्हे जैसी फिल्में बनाई. जिनमें न सिर्फ उन्होंने कहानियों में गहराई दी, बल्कि किरदारों को ऐसा बनाया कि वे आज भी याद किए जाते हैं.

1980 और 90 के दशक में जब फिल्में एक्शन और मार-धाड़ से भरी होती थीं, तब यश चोपड़ा ने अपनी रोमांस से भरी फिल्मों को फिर से परदे पर जीवंत कर दिया. उनकी फिल्म चांदनी ने दर्शकों का दिल जीत लिया. इस फिल्म ने दर्शकों को संगीत और मोहब्बत की दुनिया में पहुंचा दिया जिसे लोग भूल चुके थे. फिल्म का एक बड़ा हिस्सा स्विट्जरलैंड में शूट हुआ था और इसी से यश चोपड़ा को स्विट्जरलैंड से प्यार हो गया और उन्होंने लगातार कई फिल्मों की शूटिंग वहीं की.

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उन्होंने वहां के बर्फीले पहाड़ों और शांत झीलों को इतनी खूबसूरती से फिल्माया कि स्विट्जरलैंड की सरकार भी उनकी कायल हो गई और सम्मान देते हुए उनके नाम की एक सड़क बना दी. साथ ही एक खास ट्रेन यश चोपड़ा एक्सप्रेस चलाई गई और इंटरलेकन में 250 किलो की कांस्य प्रतिमा लगाई गई जो आज भी वहां मौजूद है.

यश चोपड़ा ने 1973 में यशराज फिल्म्स की स्थापना की, जो आज हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित प्रोडक्शन कंपनी बन चुकी है. उनके बेटे आदित्य चोपड़ा ने दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे जैसी आइकॉनिक फिल्म बनाकर इस विरासत को आगे बढ़ाया. यश चोपड़ा ने शाहरुख खान के साथ मिलकर डर, दिल तो पागल है और जब तक है जान जैसी फिल्में बनाई. जिनमें रोमांस का अलग ही रंग देखने को मिलता है.

यश चोपड़ा को सिनेमा जगत में उनके योगदान के लिए छह राष्ट्रीय पुरस्कार और आठ फिल्मफेयर अवॉर्ड्स, 2001 में भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, 2005 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है. यहीं नहीं उनको दुनिया भर के फिल्म समारोहों और संस्थाओं से भी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड्स भी दिए गए हैं.

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-भारत एक्सप्रेस 



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