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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान बस रोकती लड़की का वीडियो वायरल, जानें क्या है असल सच्चाई

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच इंटरनेट पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवती बस रोकते हुए दिख रही है.

Viral Video Girl Stopping Bus At Jantar Mantar CJP Protest is AI Generated

सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक हर तरफ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज है. 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने  जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन का ऐलान भी किया था. ऐलान होने के बाद अभिजीत दिपके समेत कई CJP नेताओं को अरेस्ट कर लिया गया.

इसी बीच इंटरनेट पर एक वीडियो तेजी से फैलने लगा है, जिसमें एक युवती  प्रदर्शन के दौरान पुलिस बस को रोकते दिखती है. वीडियो में दिख रही लड़की के पहनावे को लेकर भी लोग सवाल उठा रहे है.

क्या है वायरल वीडियो?

दरअसल, 10 अक्टूबर 2026 को एक्स यूजर ने इस वीडियो को शेयर किया. इसे शेयर करते हुए यूजर ने कहा, ‘आप जिन्हें Jantar Mantar पर देख रहे हैं, ये भारत का युवा Gen Z नहीं हैं, बल्कि विदेशी फैक्ट्री में तैयार किए गए बौद्धिक आतंकवाद का एक अराजक रूप हैं, जिन्हें आप Brainwashed कीड़े कह सकते हैं. भारत का Gen Z देश की ताकत है, किसी के एजेंडे का मोहरा नहीं!’

क्या है वीडियो की सच्चाई?

वायरल हो रहे इस वीडियो की सच्चाई जानने के लिए जब इसकी गहनता से पड़ताल की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. वीडियो के की-फ्रेम्स निकालकर जब रिवर्स इमेज सर्च किया गया, तो इससे जुड़ी कोई प्रामाणिक मीडिया रिपोर्ट नहीं मिली. जब वीडियो को ध्यान से देखा गया, तो इसमें कई अजीबोगरीब खामियां नजर आईं. वीडियो को ध्यान से देखने पर युवती से बात कर रही महिला रिपोर्टर का हाथ अचानक युवती के शरीर के आर-पार होता दिखता है.

तकनीकी पुष्टि के लिए जब इस वीडियो के फ्रेम को एडवांस्ड एआई डिटेक्शन टूल्स पर जांचा गया, तो 96 फीसदी तक संभावना जताई गई कि यह वीडियो पूरी तरह से एआई द्वारा तैयार किया गया है. एआई विशेषज्ञों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि वीडियो में रिपोर्टर का माइक अचानक छोटा हो जाता है और वह उसे कैमरे की तरह इस्तेमाल करने लगती है, जो एआई जनरेटेड कंटेंट की पहचान है.

क्या है असली बैकग्राउंड?

दरअसल, 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया था. हालांकि, बस रोकने वाली जिस लड़की का जिक्र किया जा रहा है, वैसा ही एक असली वाकया जुलाई में नीट (NEET) प्रदर्शन के दौरान देखने को मिला था. उसी पैटर्न को कॉपी करके शरारती तत्वों ने एआई तकनीक के जरिए यह फर्जी वीडियो तैयार किया और सीजेपी प्रदर्शन के नाम पर सोशल मीडिया पर फैला दिया.

इस जांच से यह साफ हो गया है कि वायरल वीडियो असली नहीं बल्कि एआई द्वारा बनाई गई है, जिसका मकसद केवल भ्रामकता फैलाना था.

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-भारत एक्सप्रेस



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