Amit Shah tribute to Ram Manohar Lohia Jayanti: महान समाजवादी चिंतक और स्वतंत्रता सेनानी डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. अमित शाह ने लोहिया जी को एक ऐसा महापुरुष बताया जिन्होंने आजादी के आंदोलन से लेकर स्वतंत्र भारत के निर्माण तक अपना संपूर्ण जीवन गरीबों, वंचितों और शोषितों के अधिकारों के लिए खपा दिया.
शाह ने विशेष रूप से लोहिया जी के ‘स्वभाषा’ (हिंदी और अन्य भारतीय भाषाएं) के प्रति अनुराग को याद करते हुए कहा कि वे एक ऐसे विचारक थे जो मानते थे कि बिना अपनी भाषा के गौरव के, कोई भी राष्ट्र पूर्ण रूप से स्वतंत्र और समर्थ नहीं हो सकता. अमित शाह के अनुसार, लोहिया जी द्वारा स्थापित ‘सामाजिक शुचिता’ (Politics of Integrity) के प्रतिमान आज की राजनीति के लिए एक अनिवार्य मापदंड हैं.
लोहिया के सपनों का ‘अंत्योदय’
अमित शाह ने अपने संदेश में रेखांकित किया कि डॉ. लोहिया ने समाज में समानता लाने के लिए जिस संघर्ष की शुरुआत की थी, उसे आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है. शाह ने कहा कि चाहे वह आर्थिक विषमता को दूर करना हो या जातिवाद के जहर को खत्म करना, लोहिया जी के विचार आज की सरकारी योजनाओं (उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत और पीएम आवास योजना) में स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित होते हैं. ये योजनाएं उसी ‘सप्त क्रांति’ का हिस्सा हैं जिसका सपना लोहिया जी ने देखा था ताकि समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी सम्मानजनक जीवन मिल सके.
शाह ने बताया लोहिया का विजन
गृह मंत्री ने लोहिया जी(Ram Manohar Lohia Jayanti) के उस विचार को साझा किया जिसमें उन्होंने शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर उसे सामाजिक सुधार का जरिया माना था. शाह ने लिखा कि लोहिया जी आजीवन इस बात के लिए कटिबद्ध रहे कि शिक्षा सुलभ हो और वह लोकभाषा में हो. वर्तमान में ‘नई शिक्षा नीति’ के माध्यम से भारतीय भाषाओं में तकनीकी और चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराने के जो प्रयास किए जा रहे हैं, अमित शाह उन्हें लोहिया जी के ‘स्वभाषा’ आंदोलन की एक बड़ी जीत मानते हैं. उनके अनुसार, लोहिया जी ने जो राह दिखाई थी, वह आज भारत को एक ‘आत्मनिर्भर’ और ‘सांस्कृतिक रूप से सशक्त’ राष्ट्र बनाने में मदद कर रही है.
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सामाजिक न्याय का असली अर्थ
अमित शाह ने डॉ. लोहिया को याद करते हुए कहा कि उनके लिए समाजवाद केवल एक राजनीतिक विचारधारा नहीं थी बल्कि यह ‘इंसान की इंसान से बराबरी’ का एक आध्यात्मिक और सामाजिक संकल्प था. शाह ने कहा कि लोहिया जी ने जिस तरह से ‘सहभागी शासन’ की बात की थी, उसे आज पंचायत से लेकर संसद तक लागू करने का प्रयास किया जा रहा है.
गृह मंत्री ने विपक्षी दलों के संदर्भ में अक्सर लोहिया जी का जिक्र करते हुए यह संदेश भी दिया है कि असली लोहियावाद सत्ता हथियाने में नहीं, बल्कि जनभागीदारी के माध्यम से राष्ट्र को मजबूत करने में है. उनकी जयंती पर दी गई यह श्रद्धांजलि इसी संकल्प को दोहराती है कि लोहिया के आदर्शों पर चलकर ही एक न्यायपूर्ण और समृद्ध भारत का निर्माण संभव है.
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-भारत एक्सप्रेस
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