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शांतिनिकेतन से पूरी दुनिया तक… गुरुदेव टैगोर की विरासत को सलाम, अमित शाह ने नई पीढ़ी को दिया खास मंत्र

गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने टैगोर को आजादी के आंदोलन का प्रेरणा स्रोत और भारतीय संस्कृति का ध्वजवाहक बताया.

Amit Shah pays tribute to Rabindranath Tagore on his birth anniversary

आज का दिन हर उस भारतीय के लिए बेहद खास है जो साहित्य, संगीत और अपनी जड़ों से प्यार करता है. अवसर है विश्व कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती का. इस पावन मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कवि गुरु को नमन करते हुए देशवासियों के साथ अपनी भावनाएं साझा कीं.

साहित्य और संगीत से जगाई आजादी की अलख

अमित शाह ने गुरुदेव को सिर्फ एक लेखक या कवि के तौर पर नहीं, बल्कि भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के एक ऐसे स्तंभ के रूप में याद किया, जिन्होंने अपनी कलम से गुलामी की बेड़ियों में जकड़े देश में नई जान फूंकी थी.

अमित शाह ने कहा कि जब देश पराधीनता के काले दौर से गुजर रहा था, तब गुरुदेव के साहित्य, संगीत और दर्शन ने लोगों की चेतना को नई गति दी. उन्होंने टैगोर को ‘भारतीय आत्मा की शक्तिशाली आवाज’ करार दिया.

‘गीतांजलि’ और ‘जन गण मन’: भारत का गौरव

अपनी श्रद्धांजलि में शाह ने विशेष रूप से गुरुदेव की अमर कृति ‘गीतांजलि’ का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इसी कृति ने पूरी दुनिया को मानवता और आध्यात्मिकता का एक नया नजरिया दिया. इसके साथ ही उन्होंने भारत के राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को राष्ट्र की एकता और आत्मसम्मान की सबसे बड़ी अभिव्यक्ति बताया.

शाह ने आगे कहा, “गुरुदेव का जीवन हमें स्वतंत्र होकर सोचने और मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि रखने की सीख देता है. उनके आदर्श और उनकी विचारधारा हमेशा हमारा मार्गदर्शन करती रहेगी.”

विरासत को नई पीढ़ी तक ले जाने का संकल्प

इस मौके पर अमित शाह ने एक वीडियो संदेश भी जारी किया. इसमें उन्होंने जोर देकर कहा कि गुरुदेव टैगोर की विरासत को न केवल संजोकर रखना है, बल्कि उनके महान आदर्शों को आज की नई पीढ़ी तक पहुँचाना हमारा सामूहिक संकल्प होना चाहिए.

टैगोर: एक बहुआयामी व्यक्तित्व

रवींद्रनाथ टैगोर (7 मई 1861) दुनिया के उन गिने-चुने लोगों में से थे, जिन्होंने साहित्य के साथ-साथ संगीत, चित्रकारी, दर्शन और शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी. उन्होंने शांतिनिकेतन में विश्व-भारती विश्वविद्यालय की नींव रखी, जो आज भी उनकी आधुनिक और समावेशी शिक्षा पद्धति का गवाह है.

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-भारत एक्सप्रेस



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