जब भी हम भारत की आजादी के मतवालों की बात करते हैं, तो जुबान पर सबसे पहले ‘भगत-राजगुरु-सुखदेव’ का नाम एक साथ आता है. ये सिर्फ तीन नाम नहीं, बल्कि उस अटूट दोस्ती और राष्ट्रप्रेम की मिसाल हैं जिसने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी थी. आज, यानी 15 मई को देश महान क्रांतिकारी सुखदेव थापर की जयंती मना रहा है. इस मौके पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने उन्हें याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है.
अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति समर्पित
अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि सुखदेव जी का अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति उनका समर्पण आज भी हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की लौ जलाए रखता है.
अमित शाह ने अपने पोस्ट में आहे कहा कि जो उन्होंने लाला लाजपत राय जी की मृत्यु का बदला लेने में निभाई थी. सुखदेव कोई साधारण युवक नहीं थे, वे हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के रणनीतिक दिमाग थे. उन्होंने भगत सिंह और राजगुरु के साथ मिलकर ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया. ये सुखदेव ही थे जिन्होंने लाहौर षड्यंत्र जैसी कई साहसिक योजनाओं को अंजाम देने में मुख्य भूमिका निभाई, जिसके कारण आखिरकार 23 मार्च 1931 को तीनों दोस्तों ने एक साथ फांसी के फंदे को चूम लिया.
लुधियाना की गलियों से शुरू हुआ ‘इंकलाब’ का सफर
15 मई 1907 को पंजाब के लुधियाना में जन्मे सुखदेव थापर बचपन से ही ब्रिटिश राज के अन्याय को देख रहे थे. वे केवल एक योद्धा नहीं थे, बल्कि एक गहरे विचारक भी थे जो एक ऐसे भारत का सपना देखते थे जहां शोषण न हो. अमित शाह ने आज देश को याद दिलाया कि आज हम जिस आजाद भारत में सिर ऊंचा करके जी रहे हैं, वो सुखदेव जैसे वीर सपूतों के सर्वोच्च बलिदान की ही देन है.
आज के युवाओं के लिए ‘आइकॉन’
सुखदेव थापर का जीवन और उनका त्याग केवल इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ये आज की युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा पुंज (Inspiration) होना चाहिए. उनकी राष्ट्रभक्ति सिखाती है कि जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य अपनी जड़ों और अपनी मातृभूमि की सेवा करना है.
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-भारत एक्सप्रेस
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