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‘जो इस्लाम को मिटाने चले, खुद मिट गए’, हिंदू राष्ट्र पर अरशद मदनी ने नेपाल का हवाला क्यों दिया

हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने तीखा बयान दिया है. उन्होंने नेपाल के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि किसी एक धर्म को राष्ट्र पर थोपने से प्रगति संभव नहीं है.

Arshad Madani

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी (Arshad Madani) ने एक बार फिर हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर तीखा बयान दिया है. मौलाना ने कहा कि कुछ सांप्रदायिक शक्तियां हिंदू राष्ट्र बनाने का सपना देख रही हैं, लेकिन उन्हें अपने पड़ोसी देश नेपाल के इतिहास से सीख लेनी चाहिए. नेपाल ने भी पहले हिंदू राष्ट्र की कल्पना की थी, लेकिन उसका परिणाम आज हम सबके सामने है.

मौलाना अरशद मदनी ने क्या कहा? (Arshad Madani statement on Hindu Rashtra)

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मौलाना अरशद मदनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “नफरत के सौदागर और हिंदू राष्ट्र का सपना देखने वालों को नेपाल से सबक लेना चाहिए. एक दिन ऐसा भी अवश्य आएगा. जब जालिमों के गले में जंजीरें होंगी और देश एक बार फिर प्यार, मोहब्बत और इंसाफ के साये में तरक्की करेगा.

उन्होंने आगे कहा कि “सांप्रदायिक शक्तियां और कुछ संगठन हिंदू राष्ट्र बनाने का सपना देख रहे हैं. जबकि उन्हें अपने पड़ोसी देश नेपाल के इतिहास से सीख लेनी चाहिए. हाल के समय में नेपाल में भी इसी तरह की विचारधारा रखने वालों ने हिंदू राष्ट्र स्थापित किया था. लेकिन आखिर वो व्यवस्था खत्म हो गई और वहां लोकतांत्रिक संविधान के तहत एक नई व्यवस्था अस्तित्व में आई. इस तथ्य से स्पष्ट होता है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में किसी भी देश की वास्तविक प्रगति, स्थिरता और जनकल्याण तभी संभव है. जब वहां लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हो. न कि किसी एक धर्म या विचारधारा को राष्ट्र पर थोपकर.”

‘इस्लाम का चिराग बुझाने वाले खुद मिट गए’ (Arshad Madani viral statement )

मौलाना मदनी ने अपने बयान में कहा कि सांप्रदायिक तत्वों की देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की कोई भी साजिश सफल नहीं हो पाएगी. सेक्युलरिज्म और भारतीय संविधान की रक्षा के लिए जमीयत उलमा-ए-हिंद अंतिम सांस तक संघर्ष जारी रखेगी. इतिहास बताता है कि जो कौम अपनी पहचान, संस्कृति और धर्म के साथ जीना चाहती है. उसे कुर्बानियां देनी पड़ती हैं.


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उन्होंने आगे कहा कि सांप्रदायिक ताकतें इस्लाम और मुसलमान दोनों को मिटाने के प्रयास में हैं. लेकिन शायद उन्हें यह नहीं मालूम कि इस्लाम का ये चिराग कभी बुझ नहीं सकता और जिन्होंने इसे बुझाने की कोशिश की, वे खुद मिट गए. हम एक जीवित कौम हैं और जीवित कौमें निराश होने के बजाय अपनी समझ, दूरदर्शिता और रणनीति से सफलता की नई कहानी लिखती हैं.

-भारत एक्सप्रेस



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