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भीलवाड़ा में न्याय के नए अध्याय की शुरुआत: 62 बीघा में बनेगा हाईटेक कोर्ट परिसर, कल दिग्गजों की मौजूदगी में होगा भूमि पूजन

भीलवाड़ा में 1948 से चल रहे कोर्ट परिसर की जगह अब आधुनिक न्यायालय भवन लेगा. 5 अप्रैल को सांगानेर तस्वारिया में 62 बीघा जमीन पर भूमि पूजन के साथ ही नई बार कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा रहा है. इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनेंगे राजस्थान के दिग्गज न्यायाधीश और राजनेता.

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Edited by Radha Priya

Bhilwara New Court Complex: भीलवाड़ा के न्यायिक इतिहास में आज यानी 5 अप्रैल का दिन एक सुनहरे अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है. शहर के बीचों-बीच सांगानेर तस्वारिया इलाके में 62 बीघा की विशाल जमीन पर नए कोर्ट परिसर का भूमि पूजन हुआ. सालों से जगह की किल्लत और सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे वकीलों और मुवक्किलों के लिए यह खबर किसी बड़ी राहत से कम नहीं है.

भीलवाड़ा को मिलेगा आधुनिक ‘न्याय का मंदिर’

मौजूदा न्यायालय परिसर की बात करें तो यह साल 1948 से, यानी आजादी के तुरंत बाद से संचालित हो रहा है. वक्त बदला, मुकदमे बढ़े और आबादी भी बढ़ी, लेकिन कोर्ट की बिल्डिंग वही पुरानी रही. आलम यह है कि कोर्ट में कुल 20 अदालतें हैं, जिनमें से जगह की कमी की वजह से 11 कोर्ट परिसर से बाहर चल रहे हैं.

फाइलों का बोझ और बढ़ती भीड़ के बीच वकीलों को बैठने तक की सही जगह नहीं मिल पा रही थी. इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने 62 बीघा जमीन आवंटित की है, जहां अब एक हाईटेक और सर्व-सुविधायुक्त नया न्यायालय परिसर आकार लेगा.

दिग्गजों की मौजूदगी में हुआ शपथ ग्रहण

सुबह 10:15 बजे इस भव्य कार्यक्रम की चमक बढ़ाने के लिए कई बड़ी हस्तियां भीलवाड़ा पहुंची. राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधिपति संजीव कुमार शर्मा और उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी की मौजूदगी में भूमि पूजन का कार्यक्रम संपन्न हुआ. इसके तुरंत बाद जिला अभिभाषक संस्था भीलवाड़ा की साल 2026 की नई कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह भी आयोजित किया गया. नवनिर्वाचित अध्यक्ष उम्मेद सिंह राठौड़ के साथ उनकी पूरी टीम ने शपथ ली कि वे विधिवत कार्यभार संभालेंगे.

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आम आदमी को क्या होगा फायदा?

बता दें कि अक्सर कोर्ट-कचहरी के नाम से ही लोग परेशान हो जाते हैं, क्योंकि वहां बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी होती है. लेकिन नए परिसर के बनने से आम जनता को भटकना नहीं पड़ेगा. एक ही छत के नीचे सारी अदालतें होने से केस की सुनवाई और तारीखों के लिए भागदौड़ कम होगी. आधुनिक बैठने की व्यवस्था, पार्किंग और बेहतर कनेक्टिविटी से न्याय की प्रक्रिया न केवल सुगम होगी बल्कि तेज भी होगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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