बिहार विधानसभा की कार्यवाही के दौरान आज (सोमवार, 23 फरवरी) को उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत मिलने वाली राशि का मुद्दा उठा. विधायकों की मांग है कि उनके क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए जो अनुशंसा राशि (फंड) दी जाती है, उसे बढ़ाया जाए.
फिलहाल, विधायकों को अपनी सिफारिश पर खर्च करने के लिए 15 लाख रुपये मिलते हैं, जिसे वे बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने की मांग कर रहे हैं. दिलचस्प बात यह रही कि इस मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष के बीच की कड़वाहट खत्म हो गई और सभी ने मिलकर सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया.
जैसे ही यह मांग उठी, देखते ही देखते पूरा सदन नारों और हंगामे से गूंज उठा. विधायकों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई और विकास कार्यों की जरूरत को देखते हुए 15 लाख की मौजूदा राशि बहुत कम है. उनका कहना है कि अगर वे अपने क्षेत्र की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना चाहते हैं, तो फंड में बढ़ोतरी जरूरी है. हंगामे की स्थिति ऐसी थी कि विधानसभा अध्यक्ष को बीच-बचाव करना पड़ा.
सरकार ने क्या भरोसा दिया?
मामले को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों को शांत कराने की कोशिश की. उन्होंने साफ किया कि सरकार इस मांग से अवगत है और पूरे मामले को संज्ञान में लिया गया है. उन्होंने आश्वासन दिया कि इस पर जल्द ही कोई ठोस फैसला लिया जाएगा.
वहीं, सदन में मौजूद उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने भी मोर्चा को संभाला. उन्होंने विधायकों को भरोसा देते हुए कहा कि वह इस पूरी मांग को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने रखेंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार विधायकों की भावनाओं का सम्मान करती है और मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद ही इस पर आगे का रास्ता साफ होगा.
आम जनता के लिए इसका क्या मतलब?
विधायकों का यह फंड स्थानीय विकास कार्यों जैसे सड़क, नाली, या सामुदायिक भवनों के निर्माण में इस्तेमाल होता है. अगर यह राशि 15 लाख से बढ़कर 25 लाख होती है, तो विधायकों के पास अपने क्षेत्र में खर्च करने के लिए ज्यादा ताकत होगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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