नई दिल्ली, 29 जुलाई। शिक्षा, सार्वजनिक प्रशासन और सामाजिक सुधार के क्षेत्रों से जुड़ी विभिन्न विभूतियों को एक मंच पर लाने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक में बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी स्थित बिहार निवास में एक प्रतिष्ठित प्रतिनिधिमंडल के साथ सार्थक चर्चा की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत की शैक्षिक संरचना को सुदृढ़ करना, प्रमुख राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान करना और राष्ट्र-निर्माण की सामूहिक दिशा तय करना था।
विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित विभूतियों का संगम
प्रतिनिधिमंडल मे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (एनसीएमईआई) के कार्यकारी अध्यक्ष एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक प्रोफ़ेसर (डॉ.) शाहिद अख्त़र और जामिया हमदर्द के कुलसचिव एवं भारतीय सेना के एक प्रतिष्ठित अधिकारी कर्नल ताहिर मुस्तफ़ा के साथ मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. इंद्रेश कुमार भी शामिल थे।
शिक्षा : राष्ट्रीय प्रगति की केंद्रीय धुरी
बिहार निवास में हुई चर्चा का केंद्र बिंदु शैक्षणिक संस्थानों, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों के संस्थानों को सशक्त बनाना तथा उन्हें राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं से जोड़ने के लिए ठोस क़दम उठाना था। डॉ. अख्त़र, जो जामिया मिल्लिया इस्लामिया सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े एक वरिष्ठ शिक्षाविद हैं, पूरे देश में अल्पसंख्यक शिक्षा सुधारों में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। उनके नेतृत्व में एनसीएमईआई ने पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए अल्पसंख्यक संस्थानों के पंजीकरण हेतु एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म शुरू करने जैसी महत्वपूर्ण पहल की है।
शैक्षिक प्रशासन में सैन्य अनुशासन का समावेश
जामिया हमदर्द के कुलसचिव के रूप में अपनी भूमिका में रणनीतिक योजना, भू-स्थानिक तकनीकों और स्वचालित सर्वेक्षण प्रणालियों का व्यापक अनुभव रखने वाले कर्नल ताहिर मुस्तफ़ा ने शैक्षिक प्रशासन में अनुशासन और सैन्य दक्षता को एकीकृत करने के अपने विचार साझा किए। विश्वविद्यालय में उनकी नियुक्ति, जिसे शिक्षा सुधार के साथ सैन्य विशेषज्ञता के संयोजन के रूप में देखा जाता है, का शिक्षकों और छात्रों ने स्वागत किया है। कर्नल मुस्तफ़ा को इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में संस्थागत विश्वसनीयता बहाल करने और पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।
राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव की साझा प्रतिबद्धता
आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक डॉ. इंद्रेश कुमार लंबे समय से शैक्षिक उत्कृष्टता को राष्ट्रीय पहचान के साथ एकीकृत करने की वकालत करते रहे हैं। उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि शिक्षा प्रगति का सबसे महत्वपूर्ण साधन है और राष्ट्रवाद तथा शिक्षा का संयोजन भारत को विश्व नेता बनने के लिए प्रेरित करेगा। इस बैठक में उनकी मौजूदगी ने शैक्षिक सशक्तिकरण के माध्यम से एकता और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
रणनीतिक दृष्टि से संपन्न राज्यपाल
लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, जिन्होंने मार्च 2026 में बिहार के 43वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी, अपने संवैधानिक कर्तव्यों के साथ लगभग चार दशकों का प्रतिष्ठित सैन्य अनुभव भी साथ लाते हैं। कश्मीर में सेना की रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 15वीं कोर के प्रमुख रहे पूर्व काउंटर-इंसर्जेंसी कमांडर हसनैन रणनीतिक मामलों, राष्ट्रीय सुरक्षा और शैक्षणिक सुधारों से गहराई से जुड़े हुए हैं। बिहार में उच्च शिक्षा को मज़बूत करने पर उनके हालिया बयान राज्य की प्रगति की आधारशिला के रूप में शैक्षणिक विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
आभार और सकारात्मक दिशा
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल के प्रति उनकी “गहन और प्रेरक बातचीत” के लिए आभार व्यक्त किया। बैठक भारत के शैक्षिक पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करने और राष्ट्र के विकास लक्ष्यों में योगदान देने के लिए सामूहिक रूप से काम करने के संकल्प के साथ संपन्न हुई। बिहार निवास में हुई यह चर्चा शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति के माध्यम से एक मज़बूत और अधिक समावेशी भारत के निर्माण के लिए विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम है।
——- भारत एक्सप्रेस
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