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गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला, अब थानों के चक्करों से मिलेगी मुक्ति, 2027 से हर पुलिस केस होगा 100% डिजिटल

देश में तीन नए आपराधिक कानूनों के दो साल पूरे होने पर गृह मंत्रालय ने बड़ा फैसला लिया है. 1 जनवरी 2027 से देश भर के थानों में पूरी तरह ‘डिजिटल इन्वेस्टिगेशन’ प्रणाली लागू हो जाएगी, जिसमें एफआईआर से चार्जशीट तक का सफर ऑनलाइन होगा.

Digital Investigation Mandatory From January 1 2027 In India MHA Decision

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देश की पुलिसिंग और कानूनी व्यवस्था को लेकर गृह मंत्रालय ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला किया है. 1 जनवरी 2027 से पूरे देश में ‘डिजिटल इन्वेस्टिगेशन’ की व्यवस्था अनिवार्य होने जा रही है. इसका मतलब यह है कि अब थानों में किसी मामले की एफआईआर (FIR) दर्ज होने से लेकर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होने तक, हर एक कदम का इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा. देश में तीन नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के ठीक दो साल पूरे होने पर सरकार ने इस बड़े रिफॉर्म (सुधार) का एलान किया है.

2 साल में बदला कानूनी इंफ्रास्ट्रक्चर

आपको याद दिला दें कि 1 जुलाई 2024 को देश में अंग्रेजों के जमाने के कानूनों (IPC, CrPC और एविडेंस एक्ट) को हटाकर तीन नए कानून- भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) लागू किए गए थे. गृह मंत्रालय के मुताबिक, इन दो सालों में जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिले हैं. नए कानूनों की बदौलत अब केस की जांच में लगने वाला औसत समय करीब 25 फीसदी तक कम हो गया है. सबसे अच्छी बात यह है कि अब लोग कहीं से भी बेहद आसानी से ‘जीरो एफआईआर’ और डिजिटल एफआईआर दर्ज करा पा रहे हैं.

आंकड़ों ने चौंकाया

सरकारी आंकड़ों की मानें तो पिछले दो सालों में देश भर में कुल 74.66 लाख एफआईआर दर्ज की गई हैं. नए नियमों की कड़ाई का ही असर है कि तय 60 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल होने की दर 50% से बढ़कर सीधे 67% पर पहुंच गई है. वहीं, महिलाओं के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों के मामलों में तो यह रफ्तार और भी शानदार रही है, जहां चार्जशीट दाखिल होने का ग्राफ 44% से बढ़कर सीधे 75% हो चुका है.

अगर इन नए कानूनों को जमीनी स्तर पर बेहतरीन ढंग से लागू करने वाले राज्यों की बात करें, तो इस रेस में हरियाणा, गोवा, असम, पंजाब और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ सबसे टॉप परफॉर्मर बनकर उभरे हैं.

पूरी तरह ‘सिटिजन सेंट्रिक’ हुई व्यवस्था

अब केस की टाइमलाइन पूरी तरह सेंट्रलाइज हो चुकी है, जिससे जांच भटकेगी नहीं. साथ ही साइंटिफिक और फोरेंसिक जांच को अनिवार्य करने से अब बेगुनाहों को फंसाना और गुनहगारों का बचना नामुमकिन हो जाएगा. सरकार का दावा है कि इस पूरी व्यवस्था को आम जनता की सहूलियत (सिटिजन सेंट्रिक) को ध्यान में रखकर अपग्रेड किया गया है, जिससे आने वाले दिनों में हर भारतीय को त्वरित और पारदर्शी न्याय मिल सकेगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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