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फर्जी FMG सर्टिफिकेट गिरोह पर SOG का बड़ा एक्शन, विदेश से MBBS करने वाले 3 डॉक्टर गिरफ्तार

Jaipur News: राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने फर्जी FMG (फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट) स्क्रीनिंग टेस्ट सर्टिफिकेट बनवाकर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है.

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Jaipur News: राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने फर्जी FMG (फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट) स्क्रीनिंग टेस्ट सर्टिफिकेट बनवाकर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई SOG थाने में दर्ज प्रकरण संख्या 08/2026 की जांच के दौरान की गई.

SOG के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस विशाल बंसल ने बताया कि विदेश से MBBS करने वाले अभ्यर्थियों को भारत में प्रैक्टिस करने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) द्वारा आयोजित FMG स्क्रीनिंग परीक्षा पास करना अनिवार्य होता है. जांच में सामने आया कि कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा पास किए बिना फर्जी सर्टिफिकेट तैयार करवा लिए और उनके आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराकर मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप भी शुरू कर दी.

जांच के दौरान SOG ने करीब 100 से अधिक संदिग्ध अभ्यर्थियों की पहचान की. इसी कड़ी में जयपुर निवासी दीपक यादव (28), दौसा निवासी राजू गुर्जर (28) और अलवर निवासी नरेश गुर्जर (30) को गिरफ्तार किया गया.

कजाकिस्तान से MBBS कर लौटे थे भारत

पूछताछ में सामने आया कि तीनों आरोपी कजाकिस्तान से MBBS कर भारत लौटे थे, लेकिन FMG परीक्षा में सफल नहीं हो सके. इसके बाद उन्होंने मुख्य आरोपी भानाराम माली और उसके नेटवर्क के माध्यम से फर्जी FMG सर्टिफिकेट तैयार करवाए. दीपक यादव ने करीब 24 लाख रुपये, राजू गुर्जर ने 27 लाख रुपये और नरेश गुर्जर ने 23 लाख रुपये खर्च कर फर्जी दस्तावेज बनवाए थे.

SOG के अनुसार नरेश गुर्जर ने फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर राजकीय मेडिकल कॉलेज अलवर में इंटर्नशिप शुरू कर दी थी, जबकि अन्य आरोपियों ने भी मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने की प्रक्रिया पूरी कर ली थी.

अबतक 17 डॉक्टर हो चुके हैं गिरफ्तार

उपमहानिरीक्षक पुलिस अजयपाल लांबा के नेतृत्व में चल रही जांच में अब तक इस मामले में 17 डॉक्टर, राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार, एक एलडीसी, मुख्य आरोपी भानाराम माली और एक दलाल सहित कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी सर्टिफिकेट बनवाने और मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने के लिए प्रति व्यक्ति 20 से 30 लाख रुपये तक वसूले गए.

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SOG का कहना है कि इस संगठित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

-भारत एक्सप्रेस



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