Bharat Express DD Free Dish

‘कफन के पैसे तो मत मांगो सरकार…’, पोस्टमार्टम हाउस से भांजे की लाश लेने के लिए देने पड़े 500 रुपये, शख्स ने FB पर साझा किया दुख

ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में 19 साल के कृष्णा की मौत पर परिजनों का आरोप- डॉक्टरों की लापरवाही से उसकी जान गई. उसके बाद पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों ने लाश देने के लिए 500 रुपये मांगे. मामा पवन सेन ने CM को टैग कर FB पर लिखा- ‘कफन के पैसे मत मांगो सरकार’.

gwalior-govt-hospital-negligence

Gwalior News: मध्‍य प्रदेश में ग्वालियर के हजार बिस्तर वाले जयारोग्य अस्पताल में सरकारी सिस्टम की लापरवाही और अमानवीयता का मामला सामने आया है. इस अस्पताल में एक युवक की मौत के बाद पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों ने परिजनों से कफन के लिए 500 रुपये वसूल किए.

यह घटना तब उजागर हुई, जब मृतक के मामा और भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी पवन सेन ने फेसबुक (Facebook) पर पोस्‍ट लिखकर आपबीती बताई. उसकी पोस्‍ट के अनुसार, मुरैना जिले का रहने वाला 19 वर्षीय कृष्णा श्रीवास अपनी चाची के साथ बाइक पर जा रहा था, उस दौरान एक वाहन की टक्कर से दोनों घायल हो गए. चाची की 1 सितंबर को मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल कृष्णा को ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल रेफर किया गया.

‘इलाज में देरी और लापरवाही से युवक की मौत’

कृष्णा के पैर में फ्रैक्चर था, लेकिन इलाज में देरी और लापरवाही के कारण 3 सितंबर को उसकी मौत हो गई. परिवार का कहना है कि डॉक्टरों ने समय पर ध्यान नहीं दिया, जिससे युवक की जान चली गई. मृतक के मामा और भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी पवन सेन ने सरकारी डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने बताया कि पैर में फ्रैक्चर होने के बावजूद दो दिन बाद प्लास्टर चढ़ाया गया.

पूरा इलाज जूनियर डॉक्टरों के भरोसे छोड़ा

पवन सेन के मुताबिक, सीनियर डॉक्टरों ने विजिट नहीं किया और पूरा इलाज जूनियर डॉक्टरों के भरोसे छोड़ दिया गया. पवन सेन ने अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुधीर सक्सेना से शिकायत की और यदि इलाज संभव नहीं तो निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति मांगी, लेकिन अधीक्षक ने बेहतर इलाज का आश्वासन दिया. परिवार का दावा है कि यह लापरवाही ही कृष्णा की मौत का कारण बनी. इससे पहले चाची की मौत भी इसी तरह की परिस्थितियों में हुई थी.

पवन सेन ने फेसबुक पर साझा किया दर्द

पीड़ित परिवार का दर्द तब और बढ़ गया जब पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों ने शव को सौंपने के लिए कफन के नाम पर 500 रुपये मांगे. परिजनों ने पैसे देकर शव प्राप्त किया. पवन सेन ने इस अमानवीय व्यवहार पर फेसबुक के माध्यम से मुख्यमंत्री मोहन यादव को टैग करते हुए पोस्ट लिखा: ‘कफन के पैसे तो मत मांगो सरकार… सरकारी डॉक्टरों की बंगलों पर ‘दुकान’ बंद करवाइए. ग्वालियर ट्रॉमा सेंटर का भगवान मालिक है. होटल, फैक्ट्री से पहले अस्पताल सुधारने पर ध्यान दीजिए.’

इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए.

अस्पताल के अधीक्षक ने बचाव में ये कहा

जयारोग्य अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुधीर सक्सेना ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इलाज में लापरवाही और कफन के पैसे मांगने की शिकायत पर विभाग प्रमुखों से जवाब मांगा गया है. लिखित रिपोर्ट मिलने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी. इस घटना ने मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां गरीब मरीजों को अक्सर ऐसी अमानवीयता का सामना करना पड़ता है. परिवार न्याय की मांग कर रहा है और उम्मीद है कि जांच से दोषियों पर कार्रवाई होगी.

यह भी पढ़िए: यमुना के उफान में बहा जुनैद, दोस्ती की शर्त बनी काल



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read