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धर्मांतरण का उद्देश्य केवल आरक्षण का लाभ प्राप्त करना है तो इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नियमित तौर पर चर्च जाने और ईसाई धर्म की परंपरा का पालन करने वाला, खुद को हिंदू बताकर अनुसूचित जाति के तहत मिलने आरक्षण का लाभ नहीं उठा सकता.

Telangana News, Supreme Court, OBC Reservation
Vikash Jha Edited by Vikash Jha

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि धर्मांतरण का उद्देश्य केवल आरक्षण का लाभ प्राप्त करना है तो इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे सामाजिक रूप से पिछड़े समुदायों को कोटा प्रदान करने का उद्देश्य विफल हो जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने पुड्डुचेरी की उस महिला की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें वह अनुसूचित जाति के तहत मिलने वाले आरक्षण का लाभ देने की मांग कर रही थी.

महिला ने दायर की थी याचिका

जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि अगर कोई धर्मांतरण सिर्फ आरक्षण का फायदा लेने के लिए कर रहा है तो उसे इसकी आड़ में इसका फायदा उठाने की इजाजत नहीं दी जा सकती. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नियमित तौर पर चर्च जाने और ईसाई धर्म की परंपरा का पालन करने वाला, खुद को हिंदू बताकर अनुसूचित जाति के तहत मिलने आरक्षण का लाभ नहीं उठा सकता. महिला ने नौकरी में अनुसूचित जाति के तहत मिलने वाले आरक्षण का लाभ हासिल करने के लिए याचिका दायर की थी.


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दोहरा दावा अस्वीकार्य

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि जहां तक इस महिला का सवाल है, वो ईसाई धर्म की परंपरा का पालन करती है, वो नियमित तौर पर चर्च जाती है, इसके बावजूद वो खुद को हिंदू बताते हुए नौकरी के मकसद से अनुसूचित जाति को मिलने वाले आरक्षण का फायदा उठाना चाहती है. कोर्ट ने कहा इस महिला का दोहरा दावा अस्वीकार्य है. ‘बापटिज्म’ के बाद वो ख़ुद हिंदू होने का दावा नहीं कर सकती, उसे अनुसूचित जाति के आरक्षण का फायदा नहीं दिया जा सकता.

-भारत एक्सप्रेस



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