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‘मेटा’ (Meta) के लिए भारत में मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. सिर्फ एक हफ्ते के भीतर कंपनी को सरकार की तरफ से दूसरा बड़ा झटका लगा है. पहले व्हाट्सएप (WhatsApp) के एक नए फीचर पर नोटिस और अब इंस्टाग्राम (Instagram) पर बच्चों से जुड़े कथित अश्लील विज्ञापनों को लेकर मोदी सरकार बेहद सख्त मूड में है. केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि मेटा को समन भेजकर इस पूरे मामले पर जवाब तलब किया जाए.
क्या है इंस्टाग्राम का पूरा विवाद?
दरअसल, ये पूरा विवाद BBC की एक खोजी रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में इंस्टाग्राम पर कुछ ऐसे पेड विज्ञापन दिखाई दिए, जो यूजर्स को सीधे टेलीग्राम चैनलों पर ले जा रहे थे. हैरान करने वाली बात ये है कि इन टेलीग्राम ग्रुप्स में बच्चों से जुड़ा बेहद आपत्तिजनक और अश्लील कंटेंट महज 99 रुपये में बेचा जा रहा था.
इसपर सरकार का सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब इंस्टाग्राम का नियम कहता है कि हर विज्ञापन उनके ‘रिव्यू सिस्टम’ से पास होने के बाद ही लाइव होता है, तो फिर ऐसे घिनौने विज्ञापन सिस्टम को चकमा देकर प्लेटफॉर्म पर कैसे आ गए?,
वहीं, इसको लेकर मेटा का कहना है कि कोई भी सिस्टम 100% परफेक्ट नहीं होता, हालांकि उन्होंने दोषी अकाउंट्स और विज्ञापनों पर कार्रवाई की है.
व्हाट्सएप के ‘यूजरनेम’ फीचर पर भी लगी रोक
इंस्टाग्राम से ठीक पहले, इसी हफ्ते आईटी मंत्रालय (MeitY) ने व्हाट्सएप को भी एक कड़ा नोटिस थमाया था. व्हाट्सएप जल्द ही एक नया फीचर लाने की तैयारी में था, जिसके तहत मोबाइल नंबर के बिना सिर्फ ‘यूजरनेम’ के जरिए लोग एक-दूसरे से चैट कर पाते.
सरकार का अनुसार, इस फीचर के आने से ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे साइबर अपराधों का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा, जिसक कारण सरकार ने बातचीत पूरी होने तक इस फीचर के रोलआउट पर रोक लगा दी है.
भारत मेटा के लिए क्यों हैं खास?
मेटा भले ही करीब 1.48 ट्रिलियन डॉलर की ग्लोबल मार्केट वैल्यू लेकिन उसके लिए भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है, जहां व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम को मिलाकर 100 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं. अकेले व्हाट्सएप के ही देश में 60 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हैं.
इसके आलावा, भारत में इन प्लेटफॉर्म्स को इस्तेमाल करने वाला सबसे बड़ा वर्ग 18 से 34 साल के युवाओं का है, जिनकी हिस्सेदारी करीब 63 फीसदी है.
अब ऐसे में युवाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सरकार कोई भी ढील देने के मूड में नहीं है. अब देखना ये होगा कि तीन दिनों के भीतर मेटा सरकार को क्या सफाई देती है.
-भारत एक्सप्रेस
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