MP Government
मध्य प्रदेश में चीनी की बढ़ती कीमतों और कालाबाजारी की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. 1 सितंबर से प्रदेश में चीनी के बथोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक लिमिट तय कर दी गई है. केंद्र सरकार के आदेश के तहत अब बड़े कारोबारी अपनी जरूरत का सिर्फ 15 दिनों का ही चीनी स्टॉक रख सकेंगे. यह नियम 30 नवंबर तक लागू रहेगा.
किन पर लागू होगा नियम और किसे मिली छूट?
नए नियमों के मुताबिक, जो संस्थान हर महीने 10 मीट्रिक टन या उससे अधिक चीनी की खपत करते हैं, वे अब 15 दिन से ज्यादा का राशन जमा नहीं कर पाएंगे.
बता दें कि इस नई लिमिट के दायरे में मुख्य रूप से बड़े हलवाई, कन्फेक्शनरी इकाइयां, बेकरी, कोल्ड ड्रिंक कंपनियां और फूड प्रोसेसिंग प्लांट शामिल होंगे. वहीं, सरकारी संस्थानों को इस स्टॉक लिमिट के नियम से पूरी तरह बाहर रखा गया है.
सरकार का साफ कहना है कि अगर कोई भी कारोबारी तय सीमा से ज्यादा चीनी जमा करता पकड़ा गया, तो उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
GST डेटा और चेकिंग से रखी जाएगी नजर
बाजार में चीनी की बनावटी किल्लत रोकने के लिए केंद्र ने अगस्त महीने के लिए मध्य प्रदेश की 22 शुगर मिलों से 39,692 मीट्रिक टन सफेद/रिफाइंड चीनी की बिक्री की सीमा तय की है.
प्रशासन इस बार किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है. चीनी की खरीद और बिक्री पर सीधे जीएसटी डेटा के जरिए नजर रखी जाएगी. इसके अलावा, खाद्य विभाग के अधिकारी गोदामों में जाकर भौतिक सत्यापन (फिजिकल चेकिंग) भी करेंगे.
सियासी बयानबाजी से गरमाया माहौल
यह फैसला ऐसे समय आया है जब राशन दुकानों (PDS) के जरिए मिलने वाली सस्ती चीनी अप्रैल महीने से ही बंद है, जिससे आम जनता पर महंगाई की मार पड़ी है. केंद्र सरकार का कहना है कि 15वें वित्त आयोग की मियाद खत्म होने के साथ ही यह सब्सिडी योजना समाप्त हो गई थी.
इस बीच कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान ने राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ा दिया है. विजयवर्गीय ने कहा था कि चीनी के दाम बहुत ज्यादा होने चाहिए और 40 की उम्र पार कर चुके लोगों को चीनी खाना छोड़ देना चाहिए. इस बयान पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे जनता की तकलीफों का मजाक उड़ाना करार दिया है.
यह भी पढ़ें: ‘ताशकंद की धरती पर…!’ उज्बेक छात्रों की हिन्दी देख गदगद हुए पीएम मोदी, VIDEO किया शेयर
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

