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‘हम दो, हमारे दो’ का झंझट नहीं! अब बच्चा पैदा करना नहीं होगी अनुशासनहीनता, मध्य प्रदेश में ‘टू चाइल्ड’ नियम खत्म

Two Child Policy Revoked In MP: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सरकारी नौकरियों और प्रमोशन में लागू 23 साल पुराने ‘टू चाइल्ड’ नियम को वापस लेने का ऐतिहासिक निर्देश दिया है. अब 2 से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवार भी सरकारी सेवा के पात्र होंगे.

Two Child Policy Revoked In MP

Two Child Policy Revoked In MP: मध्य प्रदेश की सियासत और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिसने राज्य की 23 साल पुरानी व्यवस्था को जड़ से उखाड़ फेंका है. मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों और प्रलोभनों में रोड़ा बने ‘टू चाइल्ड’ (दो बच्चों वाले) नियम को पूरी तरह से खत्म करने का आदेश दे दिया है.

सीएम मोहन यादव के इस झन्नाटेदार फैसले के बाद अब दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवार भी बिना किसी डर के सरकारी नौकरी पा सकेंगे और सेवारत कर्मचारियों के प्रमोशन का रास्ता भी साफ हो गया है. सरकार ने इस विवादित मसौदे को तत्काल प्रभाव से अपने ऑफिशियल पोर्टल से भी हटा दिया है.

साल 2001 का वो नियम (23-Year Old Two Child Policy)

दरअसल, यह कड़ा नियम वर्ष 2001 में दिग्विजय सिंह की तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से लागू किया गया था. नियम के मुताबिक, 26 जनवरी 2001 के बाद जिस भी व्यक्ति के दो से अधिक जीवित बच्चे थे, उसे सरकारी सेवा (Direct Recruitment) और विभागीय पदोन्नति (Promotion) के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाता था.

इतना ही नहीं, मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत तीसरा बच्चा पैदा करना सरकारी कर्मचारियों के लिए ‘अनुशासनहीनता’ माना जाता था, जिसके कारण कई कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई की तलवार लटकती रहती थी.

सीएम मोहन यादव का निर्देश (CM Mohan Yadav On Two Child Policy)

कर्मचारी संगठनों की बरसों पुरानी मांग और युवाओं की सहूलियत को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस कानून की समीक्षा की और इसे पूरी तरह वापस लेने का निर्देश जारी कर दिया. सीएम ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को सख्त लहजे में कहा है कि सिविल सेवा नियमों से उस प्रावधान को हमेशा के लिए डिलीट किया जाए जो तीसरे बच्चे के आधार पर युवाओं को अयोग्य ठहराता था.

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अब सरकार नए नियमों का एक नया मसौदा तैयार करेगी, जिसे सार्वजनिक सुझावों के लिए रखा जाएगा. लेकिन सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि जब तक नई अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक दो बच्चों की बाध्यता को पूरी तरह सस्पेंड (लागू नहीं) रखा जाएगा.



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