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चर्चा छोड़ हंगामे पर क्यों उतरा विपक्ष? मानसून सत्र के गतिरोध पर भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और चिराग पासवान ने की आलोचना

संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पूरे विपक्ष को मूल मुद्दों से भटकाने का काम किया और संसद में सार्थक चर्चा नहीं होने दी.

nitin nabin

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन

संसद के मानसून सत्र के दौरान लगातार बने गतिरोध को लेकर सियासत तेज हो गई है. भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर सदन की कार्यवाही बाधित करने और जरूरी मुद्दों पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि संसद जनता के मुद्दों पर चर्चा और समाधान का मंच है, लेकिन इस पूरे सत्र में विपक्ष ने गंभीर बहस के बजाय हंगामे को प्राथमिकता दी.

नितिन नवीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने बयान में कांग्रेस पर पूरे विपक्ष को मुद्दों से भटकाने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि सरकार युवाओं समेत कई मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष ने चर्चा आगे बढ़ाने के बजाय सदन की कार्यवाही में व्यवधान पैदा किया.

भाजपा अध्यक्ष ने दावा किया कि विपक्ष ने शुरुआत में युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की मांग की थी. सरकार इसके लिए तैयार हुई, लेकिन इसके बाद विपक्ष ने चर्चा से ही दूरी बना ली. नितिन नवीन ने सवाल उठाया कि अगर विपक्ष के पास सरकार से पूछने के लिए सवाल और उठाने के लिए मुद्दे हैं, तो वह सदन के भीतर बहस से पीछे क्यों हट रहा है.

उन्होंने कहा कि संसद में कई सांसदों के लिए यह पहला सत्र था. ऐसे में उनके सामने संसदीय लोकतंत्र की एक सकारात्मक तस्वीर पेश होनी चाहिए थी. लेकिन लगातार हंगामे और कार्यवाही बाधित होने से नए सांसदों को भी सदन की कार्यप्रणाली को लेकर गलत संदेश गया.

नितिन नवीन ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष के रवैये के कारण प्रश्नकाल प्रभावित हुआ और जनता से जुड़े कई अहम सवाल सदन में ठीक से नहीं उठ सके. उनके मुताबिक, लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन उसका सबसे बेहतर रास्ता चर्चा और संवाद ही है.

राहुल गांधी पर भी साधा निशाना

भाजपा अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पद संवैधानिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण और गरिमापूर्ण है. उनके आरोप के मुताबिक, राहुल गांधी के व्यवहार और भाषा से इस पद की गरिमा प्रभावित हुई है.

नितिन नवीन ने विपक्ष पर गृह मंत्री अमित शाह के सामने चर्चा से बचने का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्री सदन में तथ्यों के साथ जवाब देने के लिए तैयार थे, लेकिन विपक्ष लगातार अलग-अलग मुद्दे उठाकर चर्चा से बचता रहा.

हालांकि, ये आरोप भाजपा की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें लेकर विपक्ष का अपना पक्ष भी है. संसद में गतिरोध को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष लगातार एक-दूसरे पर सदन की कार्यवाही प्रभावित करने के आरोप लगाते रहे हैं.

चिराग पासवान ने भी विपक्ष को घेरा

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी संसद में विपक्ष के रवैये की आलोचना की. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से चर्चा के लिए तैयारी होने के बावजूद सदन की कार्यवाही बाधित करना दुर्भाग्यपूर्ण है.

चिराग पासवान के मुताबिक, सरकार छात्रों से जुड़े मुद्दों, राम मंदिर और विपक्ष की ओर से उठाए गए दूसरे विषयों पर भी चर्चा करने और जवाब देने के लिए तैयार थी. उन्होंने कहा कि संसद देश का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मंच है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलता है.

उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी मुद्दे पर असहमति होना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन उस असहमति को व्यक्त करने का सबसे उचित स्थान संसद ही है. उनके अनुसार, सवाल पूछने, सरकार को घेरने और अपनी बात रखने के लिए विपक्ष के पास सदन के भीतर पर्याप्त अवसर होते हैं.

संसद के इस सत्र को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राजनीतिक टकराव के बीच सार्थक चर्चा के लिए रास्ता निकलेगा. सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार सवालों के जवाब देने के लिए तैयार है, जबकि विपक्ष की ओर से लगातार अलग-अलग मुद्दों को लेकर विरोध और प्रदर्शन देखने को मिला है.

संसदीय कामकाज में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. सरकार के लिए जरूरी है कि वह विपक्ष के सवालों का जवाब दे, वहीं विपक्ष की जिम्मेदारी भी है कि वह जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाए और चर्चा के जरिए सरकार को जवाबदेह बनाए.

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-भारत एक्सप्रेस



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