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संसद के आखिरी 4 दिन, 3 बड़े बिल, राहुल-रिजिजू की वार्ता फेल, अब क्या दांव खेलेंगे अमित शाह?

मानसून सत्र के आखिरी चार दिनों में महिला आरक्षण, परिसीमन और FCRA संशोधन बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध गहरा गया है. राहुल और रिजिजू की बातचीत फेल, अब नजरें अमित शाह के अगले सियासी कदम पर टिकी.

Parliament Monsoon Session 2026 update: संसद के 13 अगस्त तक चलने वाले मानसून सत्र 2026 के अब केवल चार दिन बचे हैं, लेकिन देश के तीन सबसे बड़े और चर्चित विधेयकों-महिला आरक्षण, परिसीमन और फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) अमेंडमेंट बिल पर सस्पेंस और सियासी टकराव चरम पर पहुंच गया है. बता दें कांग्रेस समेत ज्यादातर विपक्षी दल इन बिलों के खिलाफ आर-पार के मूड में अड़े हुए हैं.

वहीं सोमवार को लोकसभा की कामकाज लिस्ट में इन तीनों में से कोई भी बिल शामिल न होने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या सरकार सत्र के आखिरी दिनों में कोई बड़ा सियासी दांव खेलेगी या फिर ये विधेयक एक बार फिर लटक जाएंगे?

360 के मैजिक नंबर से दूर NDA(Parliament Monsoon Session 2026)

विपक्ष के कड़े ऐतराज की सबसे बड़ी वजह संविधान का 131वां संशोधन बिल है, जिसमें 2029 से 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन का प्रस्ताव शामिल था. ज्ञात रहे अप्रैल में दो-तिहाई बहुमत न होने के कारण यह बिल 298-230 के अंतर से गिर गया था. फिलहाल लोकसभा में एनडीए की सदस्य संख्या 299 है, जो कि दो-तिहाई बहुमत के लिए जरूरी 360 के आंकड़े से काफी दूर है. ऐसे में बिना विपक्षी सहमति के इस बिल का पास होना नामुमकिन सा लग रहा है.

FCRA बिल पर कांग्रेस की खुली चेतावनी

बता दें कि विदेशी फंडिंग पाने वाले संगठनों और एनजीओ पर नकेल कसने के लिए पेश किए जाना वाला FCRA अमेंडमेंट बिल भी भारी विवादों में है. कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इसे “असंवैधानिक और जनविरोधी” करार देते हुए तीखा हमला बोला है. उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि गृह मंत्री अमित शाह सत्र के आखिरी दिनों में इस बिल को जबरन पास कराने की कोशिश न करें, वरना इसका संसद से सड़क तक कड़ा विरोध किया जाएगा.

वहीं, एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले ने भी इसे जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) के पास भेजने या वापस लेने की मांग की है.

राहुल और रिजिजू की मुलाकातें नाकाम?

सदन में जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से दो बार अलग से मुलाकात की, लेकिन बातचीत बेनतीजा रही. राहुल गांधी ने साफ़ कर दिया कि सर्वदलीय सहमति के बिना बिल आगे नहीं बढ़ाए जाने चाहिए.

इतना ही नहीं, परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर राहुल गांधी और किरेन रिजिजू के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर भी तीखा शब्द-बाण चला. वहीं, दूसरी तरफ तमिलनाडु में डीएमके (DMK) के उदयनिधि स्टालिन ने परिसीमन का पुरजोर विरोध किया है, तो अकाली दल के समर्थन से एनडीए में उनकी वापसी की चर्चाएं गरम हो गई हैं.

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इस सत्र में अब तक क्या हुआ?

विपक्ष के भारी शोर-शराबे और वॉकआउट के बावजूद मोदी सरकार ने इस सत्र में कई बड़े विधेयकों को संसद से मंजूरी दिलवा ली है:

पेपर लीक पर नकेल: परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए ‘पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल’ दोनों सदनों से पास हो चुका है.

सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या: SC में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने वाला बिल लोकसभा से क्लियर हो चुका है.

बर्थ-डेथ रजिस्ट्रेशन व MSME: जन्म-मृत्यु पंजीकरण को सख्त बनाने वाला बिल और MSME डेवलपमेंट अमेंडमेंट बिल भी पास हो गया है.

राष्ट्रीय प्रतीक सम्मान: ‘प्रिवेंशन ऑफ इन्सल्ट्स टू नेशनल ऑनर अमेंडमेंट बिल’ और बजट मंजूरी से जुड़ा ‘एप्रोप्रिएशन (No. 3) बिल’ भी दोनों सदनों से पास हो चुका है.

-भारत एक्सप्रेस

 



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