amit shah
संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन की शुरुआत राजनीतिक सरगर्मियों के बीच हुई. सदन में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष आमने-सामने दिखे. सरकार ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया, वहीं विपक्ष का कहना रहा कि इसके पीछे की मंशा पर भरोसा करना मुश्किल है.
कई विपक्षी सांसदों ने साफ कहा कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन इसे परिसीमन से अलग रखा जाना चाहिए. उनका आरोप था कि कहीं न कहीं इसके जरिए ‘बैकडोर से परिसीमन लागू’ करने की कोशिश हो रही है.
अमित शाह का तीखा जवाब
इस बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर कड़ा पलटवार किया. उन्होंने कहा कि देश में उत्तर-दक्षिण जैसी झूठी धारणाएं फैलाई जा रही हैं, जबकि संसद हर राज्य की समान रूप से प्रतिनिधित्व करती है. वह चाहे उत्तर प्रदेश हो या लक्षद्वीप हो. शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह भ्रम फैलाकर राजनीतिक फायदा उठाना चाहता है.
उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण लागू करने के लिए संसद की सीटों में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव लाया जा सकता है और सरकार इसके लिए तैयार है. साथ ही उन्होंने विपक्ष पर यह आरोप भी लगाया कि वह 2029 से पहले इस बिल को लागू नहीं होने देना चाहता.
जनगणना और परिसीमन पर सरकार का रुख
अमित शाह ने जनगणना में देरी पर सफाई देते हुए कहा कि कोविड महामारी के कारण प्रक्रिया प्रभावित हुई. उन्होंने यह भी बताया कि सरकार 2025 में जाति जनगणना कराने का फैसला कर चुकी है और इसमें जातिगत आंकड़े भी शामिल होंगे.
उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन के जरिए सीटों का संतुलन सही किया जाएगा ताकि हर वोट का मूल्य समान हो सके. उनके मुताबिक, अतीत में इंदिरा गांधी सरकार के दौरान परिसीमन पर रोक लगाई गई थी, जिसके असर आज तक दिखते हैं.
विपक्ष की ओर से अखिलेश यादव ने भी कुछ आंकड़ों पर सवाल उठाए, जिसके बाद सदन में हल्की तकरार देखने को मिली. वहीं विपक्ष का आरोप रहा कि सरकार असल मुद्दों से ध्यान भटका रही है और महिला आरक्षण के नाम पर राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ा रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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