बिहार की राजनीतिक फिजाओं में एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है. राज्य में एनडीए सरकार का एक साल पूरा होने के उपलक्ष्य में देश के प्रधानमंत्री नेंद्र मोदी के संभावित बिहार दौरे को लेकर सत्ताधारी दलों ने तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी हैं. वैशाली जिले में होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है.
दौरे को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी
पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह दौरा बिहार के लिए बेहद गर्व का विषय है. उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी नेता और कार्यकर्ता इस आयोजन को ऐतिहासिक और यादगार बनाने के लिए पूरी शिद्दत से जुटे हुए हैं, जिसके लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जा रहा है. दूसरी ओर, जिला प्रशासन और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी सुरक्षा और व्यवस्थाओं का जायजा लेने में जुट गए हैं.
छठ महापर्व और प्रशासनिक मुस्तैदी
दीपावली और लोक आस्था के महापर्व ‘छठ’ के संदर्भ में चर्चा करते हुए उमेश कुशवाहा ने कहा कि यह त्योहार बिहार की संस्कृति की आत्मा है. देश-दुनिया और देश के अन्य राज्यों में रोजगार या कामकाज के सिलसिले में रहने वाले लोग इस पावन अवसर पर अपने घर लौटते हैं. उन्होंने प्रदेशवासियों के स्वस्थ और मंगलमय जीवन की कामना की है.
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कच्ची दरगाह पुल से कम होगी दूरी
इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ सांसद संजय जायसवाल ने प्रधानमंत्री के दौरे और बिहार को मिलने वाली सौगातों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि लंबे समय से प्रतीक्षित कच्ची दरगाह पुल के निर्माण से पटना और समस्तीपुर के बीच की दूरी लगभग 40 किलोमीटर कम हो जाएगी. इस नए मार्ग के शुरू होने से न केवल आम जनता को बेहतरीन आवागमन की सुविधा मिलेगी, बल्कि शहर के भीतर भारी वाहनों का प्रवेश बंद होने से ट्रैफिक जाम की समस्या से भी बड़ी राहत मिलेगी.
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