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‘वायु, सूर्य और वरुण देव कल्याणकारी रहें’! पीएम मोदी ने शेयर किया वैदिक मंत्र, बताया प्रकृति-मानव का गहरा संबंध

PM Modi Sanskrit Mantra: पीएम मोदी ने शुक्ल यजुर्वेद का वैदिक मंत्र साझा किया. जानें वायु, सूर्य और पर्जन्य से जुड़ी इस प्रार्थना का अर्थ और प्रकृति-मानव संबंध का संदेश.

PM Modi subhashitam

पीएम मोदी ने सुभाषितम् साझा किया

PM Modi Sanskrit Mantra: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर संस्कृत का एक वैदिक मंत्र साझा किया. यह मंत्र प्रकृति के प्रमुख तत्वों वायु, सूर्य और वर्षा से जुड़े देवता से सुख, शांति और कल्याण की प्रार्थना करता है. पीएम मोदी ने शुक्ल यजुर्वेद संहिता के 36वें अध्याय के 10वें मंत्र को साझा करते हुए प्रकृति और मानव जीवन के बीच गहरे संबंध की ओर ध्यान दिलाया.

प्रधानमंत्री ने लिखा, “शं नो वातः पवतां शं नस्तपतु सूर्यः। शं नः कनिक्रदद् देवः पर्जन्योऽभिवर्षतु॥” इस मंत्र का भावार्थ है कि वायु हमारे लिए सुखद, शुद्ध और कल्याणकारी होकर बहे. सूर्य का ताप भी जीवन के लिए अनुकूल रहे और पर्जन्य देव समय पर ऐसी वर्षा करें, जिससे धरती और मानव जीवन सुखी रहे.

प्रकृति के संतुलन की प्रार्थना

यह मंत्र वाजसनेयी संहिता यानी शुक्ल यजुर्वेद का हिस्सा है. इसे प्रकृति, मनुष्य और पूरे ब्रह्मांड के बीच संतुलन और कल्याण की भावना से जुड़ी प्रार्थना के रूप में देखा जाता है. वैदिक परंपरा में प्रकृति को जीवन का आधार माना गया है. हवा, धूप और पानी के बिना मानव जीवन और खेती की कल्पना मुश्किल है. यही वजह है कि मंत्र में इन प्राकृतिक शक्तियों से अनुकूल और कल्याणकारी बने रहने की कामना की गई है.

खेती और जीवन से सीधा संबंध

वायु जहां शुद्ध सांस और प्रकृति के चक्र के लिए जरूरी है, वहीं सूर्य ऊर्जा और पेड़-पौधों में प्रकाश संश्लेषण का आधार है. बारिश खेतों और जलस्रोतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. समय पर पर्याप्त वर्षा हो तो फसल अच्छी होती है और अकाल या भुखमरी जैसी स्थिति से बचाव होता है.


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आज के दौर में जब मौसम में बदलाव और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियां लगातार चर्चा में हैं, यह प्राचीन मंत्र प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलने का संदेश भी देता है.

-भारत एक्सप्रेस



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