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राम मंदिर चंदा गबन मामले में CBI जांच की मांग, आचार्य प्रमोद कृष्णम बोले- करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास जुड़ा

Ram Mandir Scam: अयोध्या राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन को लेकर कांग्रेस के पूर्व नेता और कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई से जांच कराने की मांग की है.

Ram Mandir Scam

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Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Ram Mandir Scam: अयोध्या राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन को लेकर कांग्रेस के पूर्व नेता और कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई से जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, श्रद्धा और विश्वास से जुड़ा है, इसलिए इसकी उच्च स्तरीय जांच बेहद जरूरी है.

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि राम मंदिर से जुड़ा यह विवाद केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि यह देश और दुनिया में सनातन धर्म में आस्था रखने वाले करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा विषय है. उन्होंने कहा कि राम मंदिर में हुए कथित घोटाले, अनियमितताओं और गबन की सीबीआई जांच होनी चाहिए, ताकि लोगों का भरोसा बना रहे.

पीएम मोदी पर सनातनियों को है यकीन

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने आगे कहा कि देश की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विश्वास करती है और दुनिया भर के सनातन धर्मावलंबी भी उनसे उम्मीद रखते हैं. ऐसे में यदि राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र से जुड़े दान में गड़बड़ी के आरोप लगते हैं, तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है. उन्होंने सवाल उठाया कि यह पता चलना चाहिए कि इस पूरे मामले में कौन-कौन लोग शामिल हैं, किसकी भूमिका रही, किन लोगों ने आरोपियों को जिम्मेदारी सौंपी और यह सब किसकी निगरानी में हुआ.

इस बीच, मामले में आरोपी बताए जा रहे अनुकल्प मिश्रा के दादा राजेंद्र मिश्रा का बयान भी सामने आया है. उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उनका पोता राम मंदिर में काम कर रहा था. राजेंद्र मिश्रा ने कहा कि अनुकल्प अभी पढ़ाई कर रहा है और उन्हें मंदिर में उसके काम से जुड़ी कोई जानकारी नहीं थी.

सीएम योगी ने दिया है सख्त कार्रवाई का आदेश

वहीं, भाजपा प्रवक्ता प्रकाश रेड्डी ने उत्तर प्रदेश सरकार की कार्रवाई का बचाव किया है. उन्होंने कहा कि सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया है. रेड्डी के मुताबिक, एसआईटी ने 20 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

प्रकाश रेड्डी ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल जैसे लोग, जिन्होंने अयोध्या में मंदिर निर्माण का कभी समर्थन नहीं किया, अब इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं. उन्होंने भरोसा जताया कि उत्तर प्रदेश की जनता सरकार की मंशा और कार्रवाई को समझेगी.

सूत्रों के मुताबिक, यह विवाद तब और गहरा गया जब श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी सदस्य अनिल मिश्रा द्वारा कथित रूप से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की बात सामने आई.

25 जून को दर्ज की गई थी एफआईआर

अयोध्या राम मंदिर में प्राप्त दान राशि के कथित गबन को लेकर 25 जून को एफआईआर दर्ज की गई थी. अधिकारियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. एफआईआर में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, तिन्नू यादव, मनीष यादव और अन्य लोगों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं.

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यह मामला अयोध्या से समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडे के आरोपों के बाद सामने आया था. पांडे ने दावा किया था कि राम मंदिर के चंदे से मिली करीब 7 से 7.5 करोड़ रुपये की राशि का गबन किया गया है. इन आरोपों के बाद 14 जून को राज्य सरकार ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था.

  • भारत एक्सप्रेस


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