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सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड के गठन में देरी होने पर जताई नाराजगी

कोर्ट ने ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड के गठन में देरी पर नाराजगी व्यक्त की है, और सभी राज्यों को जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम मौका दिया है.

Supreme Court
Edited by Akansha

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड के गठन नही करने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम मौका दिया है. कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अगली सुनवाई तक उनका जवाब नहीं आया तो कोर्ट राज्यों पर 20-20 हजार रुपये जुर्माना लगाएगा. यह याचिका किन्नर माँ एक सामाजिक संस्था ट्रस्ट की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि किन्नर समुदाय की समस्याओं को देखने के लिए कोर्ट सरकार को किन्नर वेलफेयर बोर्ड बनाने का आदेश दे.

क्यो नही मिला किन्नरों को शिक्षा और नौकरी में आरक्षण ?

याचिका में यह भी कहा गया है कि स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी तमाम, सुविधाएं किन्नरों को आसानी से उपलब्ध नही होती है. उनके खिलाफ हो रहे अत्याचार या यौन शोषण की घटनाओं को पुलिस गंभीरता से नही लेती है. याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार किन्नरों को शिक्षा और नौकरी में आरक्षण नही दे रही है. बिहार सरकार की ओर से पेश वकील ने पिछली सुनवाई में कोर्ट को बताया था कि उसने ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए सभी संभव कदम उठाए है, जिसमें उनके सामाजिक विकास की निगरानी के लिए ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड की स्थापना शामिल है.

बोर्ड द्वारा समय-समय पर ट्रांसजेंडर समुदाय के सामाजिक विकास के उपायों को लागू किया जा रहा है और उनकी निगरानी की जा रही है. इसकी संरचना में ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों को उनकी मान्यता और सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए शामिल किया गया था. वही हरियाणा सरकार ने भी ट्रांसजेंडर के कल्याण के लिए बोर्ड का गठन किया है. प्रदेश के मुख्य सचिव ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड के अध्यक्ष होंगे. जबकि पुलिस महानिदेशक सहित 10 विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव और प्रधान सचिव स्तर के अधिकारी इसमें शामिल किए गए हैं.

ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड के लिए अधिसूचना जारी

इसके अलावे उत्तर प्रदेश सरकार ने भी ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड का गठन के लिए अधिसूचना जारी किया है. ट्रांसजेंडर लोगों के हितों के अधिकारों की रक्षा, सरकारी योजनाओं में समुचित भागीदारी, स्वास्थ्य, आवास, शिक्षा, कौशल विकास सहित कानूनी और सभी आवश्यक सेवाओं की पहुच सुनिश्चित करना बोर्ड की जिम्मेदारी होगी. साथ ही यह बोर्ड घर, कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के साथ भेदभाव न करना सुनिश्चित करेगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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