सीजेआई बीआर गवई. (फाइल फोटो)
Legal News: 79 वें स्वतंत्रता दिवस पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सीजेआई बी. आर गवई ने अपने संबोधन में कहा कि आजादी का संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक और नैतिक भी था. उन्होंने कहा कि संथाल समाज, जिसने सबसे पहले अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह किया, आज उसकी बेटी द्रौपदी मुर्मू देश की राष्ट्रपति हैं. यह बड़ी उपलब्धि है, लेकिन समानता और न्याय का कार्य अभी अधूरा है.
उन्होंने संकल्प लिया कि देश ऐसा बने, जहां कोई बच्चा जाति या गरीबी से शिक्षा से वंचित न रहे, कोई महिला भय में न जिए और हर नागरिक की आवाज सुनी जाए. सीजेआई गवई ने कहा कि 1855 के संथाल हूल, 1857 के विद्रोह, ज्योतिराव और सावित्रीबाई फुले के.शिक्षा आंदोलन, बिरसा मुंडा के उलगुलान, रविंद्रनाथ टैगोर के विचार, जलियांवाला बाग, गांधी के सत्याग्रह और डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के संवैधानिक योगदान का उल्लेख किया.

इतिहास के आंदोलनों और नायकों का उल्लेख
सीजेआई गवई ने न्यायाधीशों और वकीलों की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि केवल कानून लागू करना ही नही, बल्कि संविधान में निहित स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को जीना और संरक्षित करने जरूरी है. हर केस, भले ही वह छोटा क्यों न हो, किसी के जीवन, सम्मान या अस्तित्व से जुड़ा हो सकता है. सीजेआई गवई ने कहा कि हम जानते है कि विभिन्न राज्यों से आने वाले वकील बहुत अच्छा प्रदर्शन करते हैं और उनकी सेवाओं का उपयोग विभिन्न हाइकोर्ट्स में किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि मैं अपने सहयोगी जजों के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट के कुछ वकीलों को हाइकोर्ट्स के जजों के रूप में प्राप्त करने में सफल रहा हूं. उन्होंने संकेत दिया कि वो बहुत जल्द कुछ और वकीलों की नामों का सिफारिश करने की कोशिश में हूं. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों संवैधानिक कोर्ट है. सुप्रीम कोर्ट हाइकोर्ट्स से सुपीरियर नहीं है. हम केवल हाइकोर्ट्स के कॉलेजियम को नामों की सिफारिश करते है और उनसे नामों पर विचार करने को कहते है.

पूर्व सीजेआई संजीव खन्ना की संवाद प्रक्रिया का ज़िक्र
उन्होंने कहा कि पूर्व सीजेआई संजीव खन्ना ने अपने कार्यकाल के दौरान उम्मीदवारों के साथ बातचीत की प्रक्रिया शुरू की थी और यह बहुत मददगार रही है. वही आयोजित समारोह में शामिल केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि नागरिकों को भारतीय ध्वज के प्रतीकात्मक गुणों को आत्मसात करना चाहिए.
उन्होंने कहा कि नागरिकों को तिरंगे द्वारा दर्शाए गए समानता, करुणा और भाईचारा सहित प्रतीकात्मक गुणों को अपने अंदर समाहित करना चाहिए. संविधान सभा ने देश के लिए ध्वज का चयन करने के लिए एक तदर्थ समिति का गठन किया था, जिसके लिए रंग और अन्य विशेषताओं पर निर्णय लिया जाना था.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


