Delhi News: दिल्ली के बसंत कुंज के रिज इलाकों में पेड़ों की कटाई के मामले में दिल्ली वन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर चौकाने वाला खुलासा किया है. दायर हलफनामे में कहा गया है कि एक आवासीय परियोजना के लिए यहां वसंत कुंज के रिज इलाकों में पेड़ों की कटाई के लिए उप वन संरक्षक के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी अनुमति जारी की गई.
जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ 21 जुलाई को इस मामले में सुनवाई कर सकती है. कोर्ट पर्यावरण कार्यकर्ता भावरीन कंधारी की ओर से दायर याचिका पर हकफनाम दाखिल किया है.
1996 के सुप्रीम कोर्ट आदेश की अवहेलना
दायर याचिका में कहा गया है कि उक्त भूमि सुप्रीम कोर्ट के 9 मई 1996 के आदेश के तहत संरक्षित है. इसमें कहा गया था कि इस क्षेत्र में पेड़ों की कटाई या किसी भी प्रकार के बदलाव से पहले कोर्ट की पूर्व अनुमति जरूरी है. हलफनामे में कहा गया है कि यह उल्लेख करना उचित है कि प्रतिवादी के.संज्ञान में आया है कि पेड़ों की कटाई के लिए उप वन संरक्षक/वृक्ष अधिकारी (पश्चिमी वन प्रभाग) के कार्यालय के नाम पर फर्जी अनुमति जारी की गई थी. यह राकेश कुमार शर्मा को जारी की गई थी.
याचिकाकर्ता ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए)द्वारा 2015 और 2021 के बीच 60000 से अधिक पेड़ों को काटने की अनुमति दिए जाने पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि पेड़ों की कटाई की अनुमति देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है और पेड़ों के संरक्षण के लिए कोई तंत्र नहीं है. उनका यह भी आरोप है कि पेड़ों की कटाई के लिए फर्जी अनुमति जारी की गई है, विशेष रूप से आवासीय परियोजनाओं के लिए.
वन अधिकारी ने अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि पिछले साल 13 दिसंबर को उन्होंने वसंत कुंज पुलिस थाने के थाना प्रभारी को पत्र लिखा था, जिसमें इस मामले पर संज्ञान लेने और कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज करने को कहा गया था. दायर हलफनामे में यह भी कहा गया है कि प्राथमिकी के तहत जांच कर रहे वसंत कुंज थाने के सहायक उपनिरीक्षक ने वन अधिकारी को जवाबी पत्र में लिखा कि कथित फर्जी अनुमति अपठनीय है.
-भारत एक्सप्रेस
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