धर्मनान्तरण कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दायर की गई है. यह याचिका अखिल भारतीय संत समिति की ओर से वकील अतुलेश्वर कुमार की माध्यम से दायर की गई है.
याचिकाओं को हाई कोर्ट में भेजा जाए
दायर हस्तक्षेप याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि धर्मनान्तरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर सुनवाई न कि जाए. इन याचिकाओं को हाई कोर्ट में भेज दिया जाए.
दायर याचिका में कहा गया है कि वह देशभर के 127 सनातन संप्रदायों 9 लाख मंदिरों मठों और लगभग 18.5 लाख पुजारियों व 12 लाख संतों का प्रतिनिधित्व करती हैं. समिति की दलाली है कि धर्मनान्तरण विरोधी कानून धर्म की स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं करते, बल्कि बल प्रलोभन, धोखे और शादी के दुरुपयोग के जरिए होने वाले अवैध धर्मनान्तरण को रोकते हैं.
कानुन राज्य विधान सभाओं द्वारा पारित
याचिका में यह भी कहा गया है कि इन याचिकाओं की सुनवाई न कि जाए और उन्हें संबंधित हाई कोर्ट भेज दिया जाए, क्योंकि ये कानुन राज्य विधान सभाओं द्वारा पारित किए गए हैं और राज्य विशेष मुद्दे से जोड़ते हैं. समिति का कहना है कि वह इन कानूनों से जुड़ीं कानूनी और संवैधानिक जटिलताओं पर अदालत की सहायता करना चाहती हैं.
दायर याचिका में कहा गया है कि कई मामलों में शादी को धर्मनान्तरण के औजार के रूप में इस्तेमाल किया गया. इसलिए ऐसे विवाहों की जांच और अवैध पाए जाने पर उन्हें शून्य घोषित करने का प्रावधान उचित है. दायर याचिका में आईसीसीपीआर के आर्टिकल 18 (2) का हवाला दिया, जिसमें जबरन धर्मनान्तरण पर रोक लगता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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