सुप्रीम कोर्ट ने यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएसीसी) ने हलफनामा दायर कर बताया है कि यूपीएससी प्रिलिम्स परीक्षा के आंसर-की को परीक्षा के तुरंत बाद जारी कर दिया जाएगा. साथ ही छात्रों को गलत आंसर होने पर आपत्ति जताने का विकल्प भी मिलेगा.
आपत्ति दर्ज कराने का मिलेगा अवसर
आयोग ने कहा है कि अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्रों और उत्तर कुंजी पर आपत्ति दर्ज कराने का भी अवसर मिलेगा. आंसर-की पर आपत्ति दर्ज कराने वाले अभ्यर्थियों को कम से कम 3 आधिकारिक स्रोत संबंधित प्रश्न के लिए अनिवार्य रूप से देना होगा.
हालांकि फाइनल आंसर की पहले की तरह ही अंतिम परिणाम जारी होने के बाद सार्वजनिक की जाएगी. इसको लेकर छात्रों की तरफ से लगातार शिकायत की जा रही थी कि प्रिलिम्स परीक्षा में हुई संभावित गलतियों को चुनौती देने का कोई औपचारिक माध्यम नहीं है. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में हर साल पांच लाख अभ्यर्थी शामिल होते हैं और मुख्य परीक्षा में इनकी संख्या 12 हजार से 15 हजार हो जाती है. परीक्षार्थियों की शिकायत है कि गलतियों को चुनौती देने का कोई तरीका नहीं है. परीक्षार्थियों का कहना था कि फाइनल रिजल्ट आने के बाद आंसर-की जारी होने से उन्हें यह समझने में कठिनाई होती है कि वे मुख्य परीक्षा की ओर ध्यान दें.
परीक्षा के बाद ही जारी करना चाहिए आंसर-की
मामले की सुनवाई के दौरान याचिककर्ताओ की ओर से पेश वकील राजीव कुमार दुबे ने कहा था कि लगभग प्रत्येक साल सभी राज्य लोक सेवा आयोग, आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थान प्रवेश परीक्षा के तुरंत बाद आंसर-की जारी करते हैं, वैसे ही यूपीएससी को भी करना चाहिए.
यूपीएससी की इस फैसले से छात्र काफी खुश हैं. पहले यूपीएससी परीक्षा का परिणाम जारी करने के बाद आंसर की जारी करता था. लेकिन अब वो प्रिलिम्स परीक्षा के तुरंत बाद प्रोविजन आंसर की जारी करेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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