सुप्रीम कोर्ट
जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की है.
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. कोर्ट 1 सितंबर को मामले में सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह इस संबंध में एक आवेदन दाखिल करना चाहते हैं और मामले को कल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया है.
एसजी मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को अनुच्छेद 142 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल कर दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की है. एसजी मेहता ने अदालत को बताया कि पक्षकारों के बीच समझौते की स्थितिको देखते हुए एफआईआर को रद्द करने के लिए अर्जी दाखिल किया जा रहा है. इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अगर पक्षकार आपस में समझौता कर रहे हैं तो अदालत को इसमें कोई कठिनाई नहीं है.
बता दें कि सीजेपी ने इसको लेकर 5 सितंबर को प्रदर्शन करने का आह्वान किया है. इसपर रोक लगाने की सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई, लेकिन कोर्ट ने इनकार कर दिया. पिछली सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने संकेत दिया था कि जिन एफआईआर में सिर्फ छात्र आरोपी है, उन्हें सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत रद्द कर सकता है.
संसद मार्च हिंसा के वीडियो फुटेज की जांच का आदेश
कोर्ट ने यह भी कहा था कि वह दिल्ली में 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के विडियो फुटेज और सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को जांच के लिए हाई-पवार कमेटी को सौंपने का निर्देश दिया था. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने कोर्ट को बताया था कि पिछली सुनवाई में देशभर में छात्रों और युवा प्रदर्शनकरियों के खिलाफ दर्ज कई एफआईआर का मुद्दा उठाया गया था.
उन्होंने कोर्ट से अनुच्छेद 142 के तहत छात्रों के खिलाफ देशभर में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी. इसपर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि उन्हें एफआईआर रद्द करने पर कोई आपत्ति नही है. उन्होंने कहा था कि छात्र प्रदर्शनकरियों के खिलाफ एफआईआर रद्द होनी चाहिए. इसे किस तरह किया जाए, यह कोर्ट तय करें.
एसजी मेहता ने स्पष्ट किया था कि कुछ ऐसे लोग भी प्रदर्शन में शामिल हो गए थे. जिनका गंभीर आपराधिक इतिहास है. ऐसे मामलों की जांच जरूरी है और उन्हें नीट या अन्य परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के बराबर नहीं रखा जा सकता. उन्होंने गंभीर अपराधों का जिक्र करते हुए कहा था कि इनमें रेप, हत्या, पॉक्सो और अपहरण जैसे मामले शामिल है, न कि छोटे-मोटे अपराध. सीजेआई सूर्यकांत ने राज्यों से कहा था कि वे ऐसी एफआईआर की सूची दें, जिनमे केवल छात्र आरोपी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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