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मिजोरम के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व चीफ सेक्रेटरी पर लगे भ्रष्टाचार के मामले में आरोप तय

राऊज एवेन्यु कोर्ट ने मिजोरम के तत्कालीन मुख्यमंत्री जोरामथंगा और पूर्व मुख्य सचिव लालनूनमाविया चुआंगो पर लगे भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश से जुड़े मामले में आरोप तय कर दिया है.

Edited by Vaibhav Gupta

राऊज एवेन्यु कोर्ट ने मिजोरम के तत्कालीन मुख्यमंत्री जोरामथंगा और पूर्व मुख्य सचिव लालनूनमाविया चुआंगो पर लगे भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश से जुड़े मामले में आरोप तय कर दिया है.

सीबीआई के स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने अपने आदेश में कहा है कि मामले में लगे आरोपों से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य मिला है. जिनके आधार पर मिजोरम के पूर्व मुख्य सचिव लालनूनमाविया चुआंगो, तत्कालीन मुख्यमंत्री जोरामथंगा सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है.

फाइल प्रोसेसिंग में नियमों का हुआ उल्लंघन

इस मामले में अब नियमित ट्रायल चलेगा. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि शिकायतकर्ता के साथ धोखाधड़ी के आरोप सिद्ध नहीं हुए, क्योंकि शिकायत के समय कंपनी वास्तव में सरकारी उपक्रम के रूप में रजिस्टर्ड थी, लेकिन जांच में यह पाया गया कि फाइल प्रोसेसिंग में नियमों का जानबूझकर उल्लंघन हुआ और कैबिनेट की अनिवार्य मंजूरी को दरकिनार किया गया.

कोर्ट ने यह भी कहा है कि यह कार्यवाही एक साझी साजिश के तहत की गई, ताकि निजी कंपनी को अनुचित वित्तीय लाभ दिलाया जा सके. कोर्ट ने आरोपों से संबंधित दिए गए सबूतों के आधार पर माना है कि आईपीसी की 120 बी, पीसी एक्ट की धारा 13 (1)(d) और धारा 13(2) के तहत आपराधिक दायित्व बनता है.

जोरामथंगा पर प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का आरोप

यह मामला 2012-13 में एक मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनी को सरकारी कंपनी का दर्जा देने से जुड़ा है. सीबीआई के मुताबिक चेन्नई की प्राइवेट कंपनी आरएमपी इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रमोटरों ने प्राइज चिट्स एंड मनी सर्कुलेशन स्कीम्स एक्ट 1978 से बचने के लिए मिजोरम सरकार के साथ एक संयुक्त उद्यम का प्रस्ताव दिया था.

इस योजना के तहत कंपनी को सरकारी कंपनी का रूप देकर कानूनी कार्रवाई से छूट पाने की कोशिश की गई. पूर्व मुख्य सचिव लालनूनमाविया चुआंगो और तत्कालीन मुख्यमंत्री जोरामथंगा पर आरोप है कि फाइनेंस और लॉ डिपार्टमेंट के आपत्तियों के बावजूद इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया गया और निजी कंपनी के बीच एमओयू साइन किया गया. जिसमें निजी कंपनी के पक्ष में कई अनुचित शर्ते शामिल थी. आरोप यह भी है कि मार्च 2013 में मिजोरम डायरेक्ट मार्केटिंग लिमिटेड नामक कंपनी को सरकारी उपक्रम बताकर रजिस्टर कराया गया, जबकि इसे कैबिनेट से मंजूरी नही मिली थी. यहां तक कि वेबसाइट पर मुख्यमंत्री और राज्यपाल की तस्वीरें और राष्ट्रीय चिन्ह का इस्तेमाल भी बिना अनुमति किया गया.

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-भारत एक्सप्रेस



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