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‘अदालतें बंदरगाह के लाइटहाउस की तरह…’ CJI सूर्यकांत ने बताया कैसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए वरदान है भारतीय न्यायपालिका

UNCITRAL के 60 वर्ष पूरे होने पर आयोजित सम्मेलन में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय कारोबारी विवादों के समाधान के लिए एक पारदर्शी और निष्पक्ष मंच बनकर उभरा है.

India Becoming Reliable Global Hub For Commercial Disputes CJI Surya Kant
Edited by Vaibhav Gupta

अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून आयोग (UNCITRAL) की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में CJI सूर्यकांत ने भारत की न्यायिक व्यवस्था पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भारत अब एक ऐसा निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद देश बन चुका है, जहां दुनिया भर के कारोबारी विवादों को वैश्विक मानकों के अनुसार आसानी से सुलझाया जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट, विदेश मंत्रालय और UNCITRAL द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस खास कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और कई देशों के मुख्य न्यायाधीश मौजूद थे.

‘अदालतें बंदरगाह पर बने लाइटहाउस की तरह’

सीजेआई सूर्यकांत ने मध्यस्थता को आधुनिक बिजनेस वर्ल्ड का मजबूत स्तंभ बताया. उन्होंने कहा कि कई लोगों को लगता है कि अदालतें और मध्यस्थता एक-दूसरे के खिलाफ हैं, लेकिन असल में ऐसा नहीं है.

अदालतों की भूमिका को समझाते हुए उन्होंने एक सुंदर उदाहरण दिया— ‘अदालतें किसी व्यस्त बंदरगाह पर बने लाइटहाउस (प्रकाश स्तंभ) की तरह होती हैं. लाइटहाउस हर जहाज को रास्ता नहीं दिखाता, लेकिन उसकी मौजूदगी ही समुद्र में तैरते जहाजों को सुरक्षित यात्रा का भरोसा देती है.’

उदाहरण से समझाया मध्यस्थता का फायदा

सीजेआई ने कहा कि मान लीजिए भारत के किसी मेडिकल उपकरण निर्माता और दक्षिण-पूर्व एशिया के सप्लायर के बीच विवाद हो जाए. ऐसे में कोर्ट या आर्बिट्रेशन केवल कानूनी हक तय कर सकता है, लेकिन मध्यस्थता दोनों पक्षों का सालों पुराना कारोबारी रिश्ता टूटने से बचा लेती है. असली न्याय वही है जहां दोनों पक्षों का व्यापार बिना किसी नुकसान के चलता रहे.

डिजिटल क्रांति से बदली भारतीय न्यायपालिका की तस्वीर

अपने संबोधन में सीजेआई ने नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड, कोर्ट की कार्यवाहियों की लाइव स्ट्रीमिंग, रियल-टाइम ट्रांसक्रिप्शन और AI आधारित पहलों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इन तकनीकी सुधारों से भारतीय न्यायिक व्यवस्था दुनिया भर के शोधकर्ताओं, वकीलों और आम नागरिकों के लिए काफी सुलभ और पारदर्शी हुई है.

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-भारत एक्सप्रेस



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