दिल्ली के सीएम श्री स्कूलों में एडमिशन के लिए प्रवेश परीक्षा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है. दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि एडमिशन के लिए बच्चों से प्रवेश परीक्षा लेना संविधान के अनुच्छेद 21ए और आरटीई कानून की धारा 13 का उल्लंघन है.
परीक्षा रद्द करने की मांग
यह जनहित याचिका 11 साल के छात्र जनमेश सागर ने दायर की है. दायर याचिका में जुलाई 2025 में सरकार द्वारा जारी उस परिपत्र की वैधता को चुनौती दी गई है. जिसमें सत्र 2025-26 के लिए सीएम श्री स्कूलों में कक्षा VI, VII और VIII में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा के लिए दिशानिर्देश निर्धारित किए गए थे. उसने इस प्रवेश परीक्षा को संविधान से मिले अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए प्रवेश परीक्षा को रद्द करने और एडमिशन लॉटरी के जरिए देने से संबंधित निर्देश देने की मांग की गई है.
याचिका में क्या बताया गया?
याचिका में बताया गया है कि आखिर क्यों सीधे सुप्रीम कोर्ट में आने की वजह भी बताई है. इन स्कूलों में आवेदन करने के पात्र वही छात्र हैं, जो दिल्ली के निवासी है. साथ ही मान्यता प्राप्त स्कूल में वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान पढ़ाई कर रहे हैं. शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि कम से कम 50 फीसदी सीट उन छात्रों के लिए आरक्षित होंगी, जो वर्तमान में सरकारी स्कूलों में छठवीं, सातवीं और आठवीं में नामांकित हैं. इनमें शिक्षा निदेशालय, नगर निगम, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद, केंद्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय और सहायता प्राप्त स्कूल शामिल है.
क्या है सीएम श्री स्कूल योजना?
सीएम श्री स्कूल योजना दिल्ली सरकार की एक महत्वाकांक्षी शिक्षा पहल है, जिसे केंद्र की पीएम श्री योजना के मॉडल पर तैयार किया गया है. योजना के तहत स्थापित स्कूल न केवल शैक्षणिक दृष्टि से उन्नत होंगे, बल्कि पर्यावरण और तकनीक के क्षेत्र में भी अग्रणी रहेंगे. दिल्ली सरकार ने इन स्कूलों की स्थापना के लिए 100 करोड़ रुपए का विशेष कोष आवंटित किया है. इन स्कूलों में नई शिक्षा नीति के तहत पढ़ाई कराई जाएगी. इन स्कूकों का मकसद छात्रों को आधुनिक और बेहतर शिक्षा देना हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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