दिल्ली हाई कोर्ट में आईआरसीटीसी घोटाला मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ निचली अदालत द्वारा आरोप तय करने के खिलाफ दायर याचिका पर 19 जनवरी को भी सुनवाई जारी रहेगा. जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की कोर्ट दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है.
मामले की सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सीबीआई दो ऐसे बातचीत का जिक्र कर रही है, जिसका भ्रष्टाचार से कोई लेना देना नही है. सिब्बल ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 का हवाला देते हुए कहा कि जब संज्ञान लिया गया था, तब कोई मंजूरी नहीं ली गई थी. अगर मंजूरी नही है तो क्या आप आगे बढ़ सकते है? वे कहते है कि उन्होंने बाद में मंजूरी ली है. अगर संज्ञान लेने के बाद मंजूरी ली जाती है तो क्या वह मंजूरी वैध है? यह ठीक होने वाली कमी नही है. सिब्बल ने कहा कि अगला सवाल यह है कि क्या मंजूरी जरूरी है भी या नही.
सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों में ट्रायल पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट में सभी मामलों में ट्रायल पर रोक लगा दी गई है. उन्होंने यह भी कहा कि चार्जशीट पहले दाखिल की गई थी, मंजूरी बाद में ली गई. दो प्राइवेट ट्रांजेक्शन को ध्यान में नही रखा जा सकता. उन्होंने कहा कि हमारे पास ऐसे बजट हैं, जो लागू नही होते, लेकिन हमारे पास बजट होटल नही है. इन ट्रांजेक्शन का भ्रष्टाचार से कोई लेना देना नही है. लालू प्रसाद यादव सहित अन्य ने निचली अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों के खिलाफ अपील दायर की है. राऊज एवेन्यु कोर्ट के स्पेशल जज विशाल गोगने ने 13 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किया था. राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर 120 बी और 420 IPC के तहत ट्रायल चल रहा है.
कोर्ट ने लालू से पूछा था कि क्या आप आरोपो को स्वीकार करेंगे या मुकदमें का सामना करेंगे. लालू यादव ने आरोप स्वीकार करने से इंकार किया था. लालू ने कहा था कि मुकदमे का सामना करेगे. जिन धाराओं के तहत लालू पर आरोप तय किए है, उनमे शामिल है IPC 420, IPC 120B, प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 13(2) और 13 (1)(d). मामले में आरोपियों में आईआरसीटीसी के पूर्व ग्रुप जनरल मैनेजर वीके अस्थाना, आर के गोयल, सुजाता होटल्स के निदेशक विजय कोचर और विनय कोचर भी शामिल है.
रांची-पुरी BNR होटलों के टेंडर में उठा था सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव ने कहा था कि उनके खिलाफ सीबीआई के पास पर्याप्त सबूत नही है. और उन्होंने सभी आरोपों को खारिज कर दिया था. सीबीआई ने 28 फरवरी को अदालत में कहा था कि उसके पास अभियुक्तों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं. बता दें कि IRCTC का मामला लैंड फॉर जॉब मामले से अलग है. IRCTC घोटाला भी 2004 में लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुआ था. दरअसल रेलवे बोर्ड ने उस वक्त रेलवे की कैटरिंग और रेलवे होटलों की सेवा को पूरी तरह IRCTC को सौप दिया था. इस दौरान रांची और पूरी के बीएनआर होटल के रखरखाव, संचालन और विकास को लेकर जारी टेंडर में अनियमितताएं किए जाने की बात सामने आई थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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