दिल्ली के निचली अदालतों के वकीलों की बड़ी जीत हुई है. वकीलों ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी सर्कुलर के बाद हड़ताल को वापस ले लिया है. हड़ताल कर रहे वकीलों की मांग पर दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने यह सर्कुलर जारी किया है. सर्कुलर के मुताबिक अब फिर से आपराधिक मामलों में गवाही या साक्ष्य दर्ज कराने के लिए सभी पुलिसवालों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में मौजूद रहना होगा. जबकि उपराज्यपाल द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया था कि आपराधिक मामलों में गवाही या साक्ष्य पुलिस थानों में ही दर्ज कराना होगा, जिसका वकील लगातार विरोध कर रहे थे.
केंद्रीय गृह मंत्री के आश्वासन के बाद हड़ताल समाप्त
इससे पहले बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सभी जिला अदालतों के बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति से हड़ताल वापस लेने की अपील की थी. लेकिन वकीलों ने बीसीआई की मांग को ठुकरा दिया था. इससे पहले 6 दिन तक वकीलों की चली हड़ताल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आश्वासन के बाद वापस ले लिया गया था. वकीलों का कहना था कि एलजी द्वारा जारी अधिसूचना के चलते पुलिस को असीमित शक्तियां मिल गई है. एलजी द्वारा जारी नई नीति के तहत पुलिस अधिकारियों को अदालत में पेश होने की आवश्यकता नही है.
गवाही पुलिस स्टेशन से ही देने की अनुमति मिल गई है. वकीलों का आरोप था कि एलजी के इस कदम से गवाही की पवित्रता और स्वतंत्रता पर गंभीर खतरा है. उनका यह भी मानना था कि दिल्ली में यह नीति लागू करने के बाद पूरे देश में योजना को लागू किया जा सकता है. एलजी द्वारा जारी नई नीति के तहत पुलिस अधिकारियों को अदालत में पेश होने की आवश्यकता नही है. गवाही पुलिस स्टेशन से ही देने की अनुमति मिल गई है.
वकीलों का आरोप था कि एलजी के इस कदम से गवाही की पवित्रता और स्वतंत्रता पर गंभीर खतरा है. उनका यह भी मानना था कि दिल्ली में यह नीति लागू करने के बाद पूरे देश में योजना को लागू किया जा सकता है. डीएचसीबीए ने उपराज्यपाल द्वारा जारी आदेश का विरोध करते हुए इसे कानून की मूल भावना के खिलाफ बताया था.
ये भी पढ़े: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR मामले में आधार को 12वें वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने का निर्देश दिया
Also Follow Bharat Express on X
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


