सुप्रीम कोर्ट में एक गुजाराभत्ता से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान पति ने कोर्ट को बताया कि वह सिर्फ प्रत्येक दिन 325 रुपया ही कमाता है, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा हो ही नहीं सकता. हम हर महीने 10 हजार रुपए गुजाराभत्ता देने का आदेश पारित करेंगे. इस पर पति की ओर से पेश वकील ने कहा कि वह इसे अफॉर्ड नहीं कर सकता. मेरे ऑफिस के सहयोगी हलफनामा दाखिल करने के लिए तैयार है. यही वह रकम है जो मैं कमाता हूं.
कोर्ट ने हलफनामा दाखिल करने कहा
जिसके बाद कोर्ट ने जिस कंपनी में वह नौकरी करता है, उसे हलफनामा दाखिल करने को कहा है. ताकि सच्चाई का पता लगाया जा सके कि पति झूठ बोल रहा है या सच. अगर कंपनी रोजाना का 325 रुपया ही दे रही होगी, तो फिर आने वाले समय में उसकी मुश्किलें बढ़ सकती है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पैसे नहीं दे सकते तो, पत्नी को घर ले जाओ कम से कम खाना तो बनाएगी. आपके बच्चे का ख्याल रखेगी.
वकील ने कोर्ट से सहमति जताई
इसपर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि पत्नी ने माता पिता पर भी मुकदमा कर दिया है और अब रिश्ते का बचना मुश्किल है. कोर्ट ने इसके बाद कहा कि हम कंपनी को बुलाएंगे. उन्हें हलफनामा दाखिल करने को कहेंगे. इसपर पति के वकील ने सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि हां, यह दूसरे कर्मचारियों के लिए बेहतर होगा. सभी पक्षों की जिरह के बाद कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.
कोर्ट ने मानक तय किया था
एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पति से अलग होने के बाद किसी पत्नी को कितना गुजारा भत्ता मिलना चाहिए, इसको लेकर मानक तय किया है. कोर्ट ने पति के वेतन के 25 फीसदी हिस्से को इसके लिए सही और उचित बताया था. सुप्रीम कोर्ट अपने पूर्व के फैसले में कह चुका है कि गुजारा भत्ता तय करते समय दोनों पक्षों के स्टेट्स, क्षमता और मौजूदा परिस्थितियों को देखना जरूरी है.
यह भी पढ़े: ट्रेड डील से लेकर खालिस्तानी मुद्दे तक! कनाडाई पीएम मार्क कार्नी के भारत दौरे के क्या हैं मायने?
-भारत एक्सप्रेस
Written By: Shubhra Rai (Intern)
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



