जस्टिस सूर्यकांत भारत के 53 वें मुख्य न्यायाधीश बन गए. राष्ट्रपति ने द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ दिलाई है. इसके पहले जस्टिस बी आर गवई रिटायर्ड हुए है. सीजेआई सूर्यकांत ने पहले ही साफ कर दिया है कि उनका सबसे पहला फोकस देश की अदालतों में लंबित मुकदमों की संख्या को कम करना हैं.
लंबित मामले निपटाना मुख्य उद्देश्य
CJI सूर्यकांत ने कहा कि लंबित मामलों का निपटारा इंडिविजुअल कोर्ट लेवल और पैन इंडिया लेवल दोनों ही स्तर पर किया जाना चाहिए. पहले भी इन मुद्दों को उठा चुके हैं. उन्होंने हाल ही में कहा था कि भारत के मुख्य न्यायाधीश की शपथ लेने के तुरंत बाद वे देशभर के सभी हाई कोर्ट से बात कर ऐसे मामलों की पहचान करेंगे और उनका निपटारा करेंगे, जिसकी वजह से निचली अदालतों में मामले की सुनवाई नहीं हो पा रही है. उन्होंने आगे कहा कि सरकार सबसे बड़ी पक्षकार है. इस मसले पर भी काम किया जाएगा कि इसे कैसे कम किया जाए.
90 हजार से अधिक लंबित मामले
आपको बता दें कि वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में 90000 से अधिक मामले लंबित है. उन्होंने कहा था कि कई ऐसे मामले हैं, जो इसलिए नहीं चल पा रहे है क्योंकि उनसे जुड़े मुद्दे सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. मैं उन मामलों की पहचान करूंगा और तुरंत बेंच का गठन कर उनका फैसला करवाने की कोशिश करूंगा.
साधारण परिवेश से CJI तक का सफर
जस्टिस सूर्यकांत का सफर 10 फरवरी 1962 को हिसार जिले के पेटवर गांव से शुरू हुआ, जहां उनका जन्म हुआ और बचपन बहुत ही साधारण परिवेश में बीता, उन्होंने पढ़ाई गांव के स्कूल से पूरी की और गवर्नमेंट पीजी कॉलेज हिसार से 1981 में स्नातक की डिग्री प्राप्त की.
इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से 1984 में एलएलबी की पढ़ाई पूरी की. इसी साल उन्होंने हिसार के जिला न्यायालय में वकालत शुरू की और 1985 में चंडीगढ़ स्थित पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में वकालत शुरू की. जल्द ही उन्होंने संवैधानिक सेवा और नागरिक मामलों में अपनी गहरी समझ और सशक्त दलीलों से पहचान बनाई.
उन्होंने संवैधानिक, सिविल और सर्विस मामलों में विशेषज्ञता हासिल की और कई विश्वविद्यालयों, बोर्डों और बैंकों के लिए कानूनी सलाहकार के रूप में कार्य किया. हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक वकालत में उत्कृष्टता के कारण उन्हें पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट का एडवोकेट जनरल नियुक्त किया गया.
2004 में उन्हें न्यायाधीश नियुक्त किया गया और आगे चलकर वे हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने. उनकी स्पष्ट सोच, निष्पक्ष निर्णय और न्यायिक दृष्टिकोण ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट पहुंचाया. न्यायपालिका में नई ऊर्जा के प्रतीक के तौर पर सूर्यकांत को जाना जाता है. जस्टिस सूर्यकांत ने कई मामलों में ऐतिहासिक निर्णय दिए हैं, जो समाज के कमजोर वर्गों और आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा से जुड़े रहते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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