पूर्व CM पिनाराई विजयन
केरल हाई कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनारई विजयन के आवास पर ईडी की छापेमारी के दौरान ईडी के अधिकारियों हमला करने वाले आरोपी को मिली जमानत के खिलाफ दायर याचिका पर आरोपी हरीश कुमार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट 20 जुलाई को मामले में अगली सुनवाई करेगा.
ईडी ने हरीश को मिली जमानत को रद्द करने की मांग को लेकर हाई कोर्ट का रुख किया है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना आरोपी का पक्ष सुने उसकी जमानत रद्द नही की जा सकती. कोर्ट ने कहा कि वह पहले जांच करेगा और जमानत कानून सम्मत दिया गया है या नही. हरीश मामले में 9 वें आरोपी है.
सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि सेशन कोर्ट ने आरोपी को जमानत देते समय आरोपों की गंभीरता और जांच का स्थिति का आकलन किए बिना ही उसे जमानत दे दिया है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ईडी से कई सवाल किए है. कोर्ट ने पूछा कि आरोपियों पर कौन -कौन सी धाराएं लगाई गई है. किस व्यक्ति को गंभीर चोटें आई है. वह कितने दिन तक अस्पताल में भर्ती रहा, उसका उपचार से संबंधित मेडिकल रिपोर्ट कहां हैं. कोर्ट ने यह भी पूछा कि आरोपी 27 दिन तक हिरासत में था, तब जांच एजेंसी क्या कर रही थी.
लोक अभियोजक की भूमिका पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
वही ईडी ने कोर्ट को बताया कि एजेंसी एफएसएल की रिपोर्ट का इंतजार कर रही थी, इसपर कोर्ट ने कहा कि केस रिकॉर्ड में इसका कही उल्लेख नही है. सुनवाई के दौरान अभियोजक पर अदालत को गुमराह करने का भी आरोप लगाया गया. इसपर कोर्ट ने कहा कि लोकअभियोजक का काम अदालत की सहायता करना है, न कि किसी पक्ष का समर्थन करना. कोर्ट अंतिम फैसला अपनी विवेक से करती है. उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में लोकअभियोजक ने कोर्ट को गुमराह किया है तो उनके खिलाफ उचित कार्रवाई शुरू किया जाना चाहिए. इसपर कोर्ट को बताया गया है अभियोजक गीता कुमारी को उनके पद से हटा दिया गया है.
बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री के आवास सहित 10 जगहों पर छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम देकर जब ईडी के अधिकारी वापस जाने लगे, उस दौरान समर्थकों ने उनपर हमला कर दिया था. कन्नूर के ईडी की टीम पर यह हमला हुआ था. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया था. छापेमारी टीम में 12 अधिकारियों में से 4 महिला अधिकारी शामिल थे.
आयकर जांच के बाद एसएफआईओ और ईडी की कार्रवाई तेज हुई
सीएमआरएल एक पब्लिक लिस्टेड कंपनी है, जिसमें बड़ी हिस्सेदारी आम निवेशकों और केरल सरकार की पीएसयू कंपनी केरल स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की है. कंपनी का कंट्रोल मैनेजिंग डारेक्टर एस. एन ससीधरन कार्थो और उनके बेटे सारन एस कार्थो के पास बताया गया जाता है. यह मामला पहली बार 2019 मे सामने आया था, जब आयकर विभाग ने सीएमआरएल पर छापा मारा था. जांच में करीब 130 करोड़ रुपए के फर्जी खर्च सामने आए थे.
बाद में कंपनी ने इन फर्जी खर्चो को आयकर टैक्स सेटलमेंट कमीशन के सामने स्वीकार भी किया था. इसके बाद सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन आफिस (SFIO) तक पहुचा और कॉरपोरेट फ्रॉड की जांच शुरू हुई. इसी आधार पर ईडी ने भी पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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