कोलकाता आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी महिला डॉक्टर से रेप और हत्या के बाद डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर गठित नेशनल टास्क फोर्स को राज्यों व अन्य पक्षों द्वारा दी गई रिपोर्ट पर जवाब दाखिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आठ साप्ताह का समय दे दिया है. जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सभी पक्षो की दलीलें सुनने के बाद एनटीएफ को 8 हफ्ते का समय दिया है. कोर्ट ने NTF से 12 रिपोर्ट मांगा है. कोर्ट 17 मार्च को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. पिछली सुनवाई में नेशनल टास्क फोर्स ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौप दिया था.
डॉक्टरों की सुरक्षा पर कोर्ट की सख्ती
राष्ट्रीय टास्क फोर्स ने कहा था कि चिकित्सको के खिलाफ हिंसा से निपटने के लिए अलग से केंद्रीय कानून होना चाहिए. राष्ट्रीय टास्क फोर्स ने कहा था कि विभिन्न राज्यों ने मेडिकल प्रतिष्ठानों में हिंसा से निपटने के लिए विशेष रूप से कानून बनाए है. एनटीएफ की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 24 राज्यों ने मेडिकल पेशेवरों के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए विशेष कानून पारित किए हैं. एन टी एफ ने अस्पतालों में सुरक्षा में सुधार के लिए सिफारिश भी की है. जैसे प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, रात की शिफ्ट में सुरक्षा प्रोटोकॉल और मेडिकल कर्मचारियों के लिए परिवहन, सीसीटीवी बढ़ाना, सुरक्षा जांच आदि.
इसने सुझाव दिया कि रात के समय आपातकालीन इकाइयों में वरिष्ठ निवासी मौजूद हो सकते है. अस्पतालों में मेडिकल पेशेवरों के खिलाफ हिंसा के किसी भी कृत्य की रिपोर्टिंग के छह घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए.
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय टास्क फोर्स की रिपोर्ट को विभिन्न राज्यों ने मेडिकल प्रतिष्ठानों में हिंसा से निपटने के लिए राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझा करने को कहा था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कोलकाता की अदालत ने मुख्य आरोपी संजय रॉय के खिलाफ आरोप तय कर दिए है. एएसजी ने कोर्ट को बताया था कि 37 संगठनों के 1700 सुझाव राष्ट्रीय टास्क फोर्स के पास पहुच गए है. बडी संख्या में सुझाव आने के कारण टास्क फोर्स को कुछ समय लग रहा है.
ऐसा आरोप है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद राष्ट्रीय टास्क फोर्स ने अब तक कोई महत्वपूर्ण कदम नही उठाया है.
भारत एक्सप्रेस
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