सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौधोगिकी मंत्रालय से लोगों के चोरी हुए व्यक्तिगत डेटा की पुनः प्राप्ति या उसे नष्ट करने की मांग वाली जनहित याचिका पर जांच करने का निर्देश दिया है. जिसमें कथित तौर पर चुराए गए और विदेशी सर्वर पर स्टोर किए गए भारतीयों के पर्सनल डेटा को बरामद करने या नष्ट करने के लिए एक मजबूत सिस्टम की मांग की गई है.
जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह आदेश दिया है. कोर्ट ने साइबर सिक्योरिटी कंसल्टेंट नीतीश कुमार की फाइल की गई जनहित याचिका पर दिया है. साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपनी शिकायतों के साथ सरकार से संपर्क करने को कहा है. कोर्ट ने कहा यह मामला सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से संबंधित है.
मामले की सुनवाई के दौरान कुमार ने देश के सामने खड़े एक गंभीर सुरक्षा संकट की ओर इशारा किया. उन्होंने कोर्ट को बताया कि कम से कम पांच विदेशी देशों में सक्रिय अपराधियों ने फिंगरप्रिंट और अन्य पहचनकर्ताओं सहित भारतीयों के संवेदनशील डेटा चुरा लिया है.
सुप्रीम कोर्ट में विदेशी सर्वरों पर स्टोर भारतीय डेटा को लेकर चिंता
दायर याचिका में कोर्ट से डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 को लागू करने और डेटा उल्लंघनों से जुड़े डिजिटल अरेस्ट और जबरन वसूली में वृद्धि को कम करने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की थी. कोर्ट ने कहा कि जब तक प्रत्यर्पण संधि नही होती, तब तक आरोपियों को कानून का सामना करने के लिए यहां नहीं लाया जा सकता. याचिकाकर्ता ने कहा कि यदि हम डेटा वापस नहीं ला सकते, तो कम से कम उसका पुनर्गठन कर उसे सुरक्षित तो रख सकते है.
याचिका में यह भी कहा गया था कि फिंगरप्रिंट और पर्सनल आइडेंटिफिकेशन (व्यक्तिगत पहचानकर्ता) जैसी संवेदनशील जानकारी का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट जैसे ट्रांसजेक्शनल क्राइम को आसान बनाने के लिए किया जा रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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